पलक-पांवड़े बिछे, गूंजे जयकारे: शाही वैभव के बीच आचार्य सुन्दर सागर महाराज का ऐतिहासिक नगर प्रवेश

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में रविवार को निवाई नगर आध्यात्मिक आस्था के रंग में सराबोर हो उठा, जब तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर महाराज के परम शिष्य युवाचार्य सुन्दर सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास हेतु ऐतिहासिक एवं भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर की सीमा से लेकर मंदिर परिसर तक श्रद्धालुओं ने पग-पग पर चरण प्रक्षालन, पुष्पवर्षा और भव्य स्वागत-सत्कार कर अपने आराध्य के प्रति अगाध श्रद्धा व्यक्त की। पूरे मार्ग पर जैन समाज ने मानो पलक-पांवड़े बिछा दिए, जबकि जयकारों और भजनों से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। चातुर्मास समिति के प्रवक्ता सुनील भाणजा एवं हितेश छाबड़ा ने बताया कि सुबह से ही टोंक जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रावक-श्राविकाएं निवाई पहुंचने लगे थे। नगर सीमा पर समाज के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री की अगवानी की। वर्धमान सर्विस सेंटर से प्रारंभ हुआ भव्य शोभायात्रा जुलूस जैन नसिया मंदिर, बिचला जैन मंदिर, बड़ा जैन मंदिर, बड़ा बाजार, चंद्रप्रभु जैन मंदिर, अहिंसा सर्किल और भगवान महावीर मार्ग से होते हुए श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर पहुंचा। जुलूस में सबसे आगे चार घोड़ों पर सवार युवक जैन ध्वज लहराते हुए चल रहे थे। उनके पीछे ऐरावत हाथियों पर ध्वजारोहण एवं पाद प्रक्षालन करने वाले श्रद्धालु विराजमान थे। सुसज्जित रथ पर जिनवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। सोनम बैंड, डीजे बैंड और नैनवा से आए बैंड की मधुर जैन भजनों की धुन पर युवा भक्ति नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहे थे, जबकि महिला मंडल एकरूप ड्रेस कोड और साफों में जैन ध्वज लेकर जयकारे लगाता हुआ चल रहा था।
अग्रवाल मंदिर पहुंचने पर ध्वजारोहण, चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ धार्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जयपुर, माधोराजपुरा, फागी, नैनवा, केकड़ी सहित विभिन्न स्थानों से आए अतिथियों ने समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि "जिस नगर में दिगम्बर संतों का आगमन होता है, वह भूमि धन्य और पूज्य बन जाती है तथा संतों के प्रस्थान के बाद वही नगर सूना-सूना प्रतीत होता है।" उन्होंने धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। समारोह में मंदिर अध्यक्ष सुशील आरामशीन, विष्णु बोहरा, राजेन्द्र बगड़ी, नेमीचंद गंगवाल, महावीर माधोराजपुरा, गिर्राज मोटूका, महावीर प्रसाद पराणा, महेन्द्र चंवरिया, अमित कटारिया, रोनक बोहरा, जितेन्द्र झिलाय, चेतन जैन, विमल जैन, महेन्द्र सारसोप, नेहरू बड़ागांव, अनिल भाणजा, दिलीप भाणजा, महेन्द्र कठमाणा, दिनेश चंवरिया, हेमचंद संघी, शिखरचंद काला, हेमंत चंवरिया, लालचंद कठमाणा, आशीष चंवरिया, गोपाल कठमाणा, सुनील बनेठा, चन्द्रेश शिवाड़, विनोद बनस्थली सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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