जल संसाधन मंत्री का बयान भ्रामक

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धन सिंह शेखावत ने जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि यमुना जल परियोजना से संबंधित MOA सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध है। यशवर्धन सिंह शेखावत ने कहा कि मंत्री का यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और जनता को गुमराह करने वाला है। वास्तविक स्थिति यह है कि यह दस्तावेज़ न तो केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission) के पोर्टल पर उपलब्ध है, न Upper Yamuna River Board (UYRB) के पोर्टल पर और न ही राजस्थान सरकार के किसी अधिकृत पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री का दावा सही है, तो वे तत्काल उस पोर्टल का नाम और लिंक सार्वजनिक करें, जहाँ यह दस्तावेज़ उपलब्ध है। यदि ऐसा नहीं कर सकते, तो उन्हें अपने भ्रामक बयान के लिए जनता से क्षमा मांगनी चाहिए। यशवर्धन सिंह शेखावत ने बताया कि उन्होंने स्वयं 29 मई 2026 को Upper Yamuna River Board के समक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत यमुना जल परियोजना की वर्तमान स्थिति और संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।

*RTI विवरण*

* Registration Number: UYRBD/R/E/26/00011

* Date of Filing: 29/05/2026

* Public Authority: Upper Yamuna River Board (UYRB)

उन्होंने कहा कि कानून द्वारा निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद आज तक इस RTI का कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है। यदि वास्तव में सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हैं, तो फिर RTI का उत्तर देने में देरी क्यों की जा रही है। यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि परियोजना से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने में अनावश्यक गोपनीयता बरती जा रही है। यशवर्धन सिंह शेखावत ने कहा कि यमुना जल परियोजना शेखावाटी के लाखों लोगों के भविष्य से जुड़ा विषय है। ऐसे महत्वपूर्ण मामले में सरकार की जिम्मेदारी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है, न कि भ्रामक बयान देकर जनता को भ्रमित करने की।
उन्होंने राज्य सरकार एवं संबंधित एजेंसियों से मांग की कि—

* नवीन MOA की प्रमाणित प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए।
* परियोजना की DPR एवं उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
* परियोजना की लागत, वित्तीय भागीदारी एवं कार्यान्वयन की समय-सीमा जारी की जाए।
* UYRB के समक्ष दायर RTI आवेदन का तत्काल उत्तर दिया जाए।
* जल संसाधन मंत्री अपने बयान के समर्थन में संबंधित सार्वजनिक पोर्टल का प्रमाण प्रस्तुत करें अथवा अपने तथ्यात्मक रूप से गलत बयान को वापस लें।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता सरकार की जवाबदेही का आधार है। जनता को अपने जल अधिकारों से जुड़े दस्तावेज़ों और निर्णयों की जानकारी प्राप्त करना उसका संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी परिस्थिति में छिपाया नहीं जा सकता।

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