शेखावाटी के एसएमएस के नाम से विख्यात बिरला सार्वजनिक अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश का पर्दाफाश

AYUSH ANTIMA
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पिलानी का बिरला सार्वजनिक अस्पताल जो शेखावाटी के एसएमएस के नाम से विख्यात रहा है व सस्ती व उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देना ही अस्पताल के प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य रहा है। यह अस्पताल बिड़ला परिवार के वटवृक्ष श्रीयुत रामेश्वर दास बिडला (आरडी बाबू) की परिकल्पना थी कि लोगों को उत्तम व सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सके। इस अस्पताल का उद्धघाटन स्वतन्त्र भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर के कर कमलों द्वारा हुआ था। करीब सात दशक से यह अस्पताल अनवरत शेखावाटी के लोगों की सेवा करता आ रहा है। इन सात दशकों में इस अस्पताल ने बहुत उतार चढ़ाव देखे लेकिन अपने मूल उद्देश्य से कभी विमुख नहीं हुआ। वर्तमान में यह अस्पताल डॉ.मधुसूदन मालानी के कुशल नेतृत्व में आधुनिक व उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रदान करने के उच्चतम आयाम स्थापित किए हैं लेकिन यह प्रकृति का नियम है कि यदि किसी व्यक्ति की बराबरी न कर सके तो अपने निजी हितों को साधने को लेकर उसको बदनाम किया जाए। ऐसी ही नाकाम कोशिश का पर्दाफाश करने को लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) जो अपनी निष्पक्ष, सटीक, जनोपयोगी पत्रकारिता के लिए लिखा है। उसी को लेकर लेख की प्रेरणा मिली कि शेखावाटी के लोगों को सच्चाई से रूबरु करवाया जाए। डॉक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं और उसी अवधारणाओं के साथ डॉ.आरके जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में श्रीमति मंजू देवी, जो पेट के दर्द की शिकायत को लेकर उनकी देखरेख में अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 8 दिसंबर 2023 को उनका सफल आपरेशन हुआ व 14 दिसंबर 2023 को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, तत्पश्चात श्रीमति मंजु देवी के फिर पेट में दर्द उठा और उनको जयपुर के मणीपाल अस्पताल में भर्ती करवाया गया व दुर्भाग्य से उनकी जयपुर में मौत हो गई। अब इस एपीसोड का दूसरा पहलू सामने आता है। जिले के स्थानीय नेता व पिलानी विधानसभा के प्रत्याशी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अस्पताल व अस्पताल प्रबंधन को बदनाम करने की नीयत से धरना प्रदर्शन करते हैं। उस धरना प्रदर्शन मे अस्पताल के डॉ.मधुसूदन मालानी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आरके जैन के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। उन नेताओं का इस धरना प्रदर्शन में एक हिडन निजी स्वार्थ था, जो मृत आत्मा की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने की जुगत में थे। यहां तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी से हाथापाई भी की गई। मामले की संवेदनशीलता देखते हुए प्रशासन हरकत में आया और इस मामले को लेकर एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया। जांच सिमिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी झुंझुनूं को सौपी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 24 जून 2026 के पत्र द्वारा जिला कलेक्टर को अवगत कराया कि जांच समिति की रिपोर्ट से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि डॉ.आरके जैन द्वारा की गई शल्य चिकित्सा में कोई लापरवाही नहीं बरती गई व श्रीमति मंजु देवी के इलाज में उन्होंने वह व्यवहार किया, जो एक डॉक्टर को मानवीय व अपने पेशे के मध्यनजर करना चाहिए था। अब सवाल उठता है कि जो स्थानीय नेता सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर अपना राजनीतिक व निजी हितों को साधने में पूरी ताकत लगा देते हैं। क्या उनके पास जांच समिति द्वारा अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आरके जैन को निर्दोष साबित किया, उसका जबाब है। इस धरना प्रदर्शन की आड़ में जो अस्पताल की छवि को धूमिल करने की नाकाम कोशिश की गई, उसका पर्दाफाश हो जाने से इस अस्पताल ने अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखी है। अस्पताल में डॉ.मधुसूदन मालानी के कुशल नेतृत्व में अस्पताल में वह आधुनिक व उच्चतम क्वालिटी की सेवाओं में विस्तार हुआ है, जो जयपुर के अस्पतालो मे उपलब्ध है। डॉ.मालानी अपने पूर्वजों के पदचिन्हो पर चलकर उसी अवधारणाओं से अस्पताल का संचालन कर रहे हैं, जो परिकल्पना को लेकर श्रीयुत रामेश्वर दास बिड़ला (आरडी बाबू) ने इस अस्पताल की नींव रखी थी कि पिलानी व आसपास के गांवो को ही नहीं अपितु पूरे शेखावाटी क्षेत्र के लोगों को सस्ती व उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाये मिलती रहे।

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