वोट के वक्त 'बहनें', हक की बारी आई तो 'मौन': आंगनबाड़ी केंद्रों पर लटके ताले, सरकार को आर-पार की चेतावनी

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): वर्षों से सरकार की योजनाओं का बोझ अपने कंधों पर उठाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। नियमितीकरण और लंबित मांगों पर लगातार अनदेखी से नाराज प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्मिकों ने 1 जुलाई से जारी कार्य बहिष्कार को अब और तेज करते हुए 10 जुलाई से निवाई क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़ दिया। केंद्रों के बंद होने से पूर्व प्राथमिक शिक्षा, पोषाहार वितरण और टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गईं। आंदोलन के तहत आईसीडीएस परियोजना निवाई की समस्त आंगनबाड़ी कार्मिकों ने अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की निवाई शाखा अध्यक्ष राजकुमारी गौतम के नेतृत्व में जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जिला कलेक्टर टीना डाबी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वर्षों से लंबित मांगों का शीघ्र समाधान करते हुए नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय देने की मांग उठाई गई। आंगनबाड़ी कार्मिकों का कहना है कि सरकार की अधिकांश जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, लेकिन जब उनके अधिकारों और सम्मान की बात आती है तो केवल आश्वासन ही मिलते हैं। उनका आरोप है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उनकी जायज मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कार्मिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं मौजूद रहीं। आंदोलन के चलते केंद्रों पर ताले लटकने से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाली कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित होती नजर आईं।

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