निवाई (लालचंद माली): अर्जुन नगर से निवाई बाईपास की ओर करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे नाले का निर्माण कार्य शुरू से ही विवादों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस निर्माण में गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है। लोगो का कहना है कि जिस नाले से वर्षों तक जल निकासी की उम्मीद की जा रही थी, वह निर्माण के दौरान ही अपनी बदहाली की कहानी बयां करने लगा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नाले में उपयोग की गई सीमेंट और निर्माण सामग्री इतनी घटिया है कि कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ चुका है, कंक्रीट टूट रही है और सतह हाथ लगाने मात्र से झड़ने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही यह हाल है तो आने वाले समय में यह नाला जनता की सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी धन की बर्बादी का स्मारक बन जाएगा। लोगो का आरोप है कि निर्माण कार्य में न तो तकनीकी मानकों का पालन किया गया और न ही गुणवत्ता नियंत्रण का। उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो नियम-कायदों को ताक पर रखकर केवल कागजों में विकास दिखाने और सरकारी धन की बंदरबांट का खेल खेला गया हो। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि "यह नाला पानी निकालेगा या भ्रष्टाचार की परतें खोलेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कार्य इतनी निम्न गुणवत्ता का होगा तो जनता के टैक्स का पैसा आखिर किसके हित में खर्च किया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार इंजीनियरों और अधिकारियों ने या तो निर्माण की निगरानी नहीं की, या फिर सब कुछ देखकर भी आंखें मूंद लीं। लोगो का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने मांग की है कि निर्माण सामग्री की लैब जांच कराई जाए, कार्य की माप पुस्तिका (एमबी) और भुगतान का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए तथा दोषी पाए जाने पर ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्षेत्र में चर्चा का विषय बना यह निर्माण अब केवल एक नाले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
*जनता का सवाल: क्या यही है विकास की तस्वीर*
करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन नाले में मजबूती नहीं, केवल भ्रष्टाचार की परतें दिखाई दे रही हैं। आखिर जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा।