बीकानेर (मुकेश रामावत): जिला कलक्टर निशान्त जैन ने शुक्रवार को राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रतिष्ठान में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों और चल रहे शोध कार्यों की जानकारी ली। कलक्टर ने बताया कि प्रतिष्ठान में प्राकृत, राजस्थानी, हिन्दी और संस्कृत भाषा की 29 हजार से अधिक पांडुलिपियां संरक्षित हैं। उन्होंने इनके त्रिस्तरीय संरक्षण की प्रक्रिया देखी और कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक तरीके से परिरक्षण जरूरी है।
*लेबोरेट्री स्थापित करने के निर्देश*
जिला कलक्टर ने प्रतिष्ठान में परिरक्षण लेबोरेट्री स्थापित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे बीकानेर संभाग की लाखों पांडुलिपियों का बेहतर संरक्षण हो सकेगा। साथ ही उन्होंने पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन और ज्ञान भारतम मिशन के कार्यों में तेजी लाने को भी कहा।
*शोध के लिए मॉडल केंद्र बने प्रतिष्ठान*
निशान्त जैन ने कहा कि देश-विदेश से आने वाले शोधार्थियों को इस केंद्र का अधिक से अधिक लाभ मिले। इसके लिए इसे शोध और संदर्भ सामग्री के लिहाज से मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
*अब तक 217 से ज्यादा प्रकाशन*
प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ.नितिन गोयल ने बताया कि संस्थान द्वारा अब तक नैणसी री ख्यात, सीताराम लालस का शब्दकोष, बांकीदास री ख्यात सहित 217 से अधिक महत्वपूर्ण ग्रंथ प्रकाशित किए जा चुके हैं। ये प्रकाशन राजस्थानी साहित्य में मील का पत्थर माने जाते हैं। डॉ.गोयल ने बताया कि प्रतिष्ठान में प्रदेश की पहली एआई आधारित कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई। साथ ही ‘सुनी, लिखी, पढ़ी व्याख्यान’ श्रृंखला के माध्यम से शोध और साहित्य को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस दौरान प्रतिष्ठान के अधिकारियों ने कलक्टर को विभागीय प्रकाशनों की सूची और कैटालॉग भी दिखाया।