सरकारी कुर्सी, सरकारी जमीन... फिर भी रास्तों पर कब्जा! बुवाई रुकी तो किसानों का फूटा गुस्सा

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): उपखंड क्षेत्र के गांव लुणेरा की बीड़ की ढाणी में खेतों तक जाने वाले सार्वजनिक रास्तों पर कथित अतिक्रमण ने किसानों की खेती पर संकट खड़ा कर दिया है। किसानों का आरोप है कि सरकारी कर्मचारी और उनसे जुड़े लोगों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा कर वर्षों पुराने दो मुख्य रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया है, जिससे खरीफ फसल की बुवाई तक प्रभावित हो गई है। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज किसानों ने नवनियुक्त तहसीलदार सृष्टि जैन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि हिंगोनिया बुजुर्ग के कुछ लोगों ने लुणेरा की बीड़ की ढाणी में खेतों तक पहुंचने वाले दोनों प्रमुख रास्तों पर अतिक्रमण कर रखा है। यही रास्ते किसानों के लिए खेतों तक पहुंचने का एकमात्र साधन हैं। रास्ता बंद होने से ट्रैक्टर, कृषि यंत्र और अन्य वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि लगातार बारिश के बीच बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण समय निकलता जा रहा है। किसान बद्रीलाल, नारायण, बनवारी और रामेश्वर ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण का विरोध करने पर उन्हें अनुसूचित जनजाति अधिनियम के झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले आयोजित राजस्व शिविर में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की कि राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर तत्काल सीमांकन कर सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए तथा यदि जांच में कोई भी व्यक्ति—चाहे वह सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो—दोषी पाया जाए तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। नवनियुक्त तहसीलदार सृष्टि जैन ने किसानों को आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शीघ्र राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

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