श्रीनिवास नहीं जाएंगे दिल्ली: अगला मुख्य सचिव कौन होगा, सचिवालय में चर्चा तेज

AYUSH ANTIMA
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जयपुर: राजस्थान की नौकरशाही की सबसे बड़ी कुर्सी को लेकर सत्ता और सचिवालय के गलियारों में चर्चाओं का दौर अपने चरम पर है। 31 अगस्त को वर्तमान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि राज्य की प्रशासनिक कमान आगे किसके हाथों में होगी।
कुछ समय पहले तक लगभग तय माना जा रहा था कि वी. श्रीनिवास का अगला पड़ाव दिल्ली होगा। देश के अगले केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के लिए उनका नाम गंभीर दावेदारों में शामिल माना जा रहा था। मौजूदा सीवीसी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का कार्यकाल भी अगस्त में समाप्त हो रहा है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर श्रीनिवास के नाम की चर्चा स्वाभाविक थी। विश्वसनीय प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अंतिम चयन प्रक्रिया से पहले ही श्रीनिवास ने इस पद के प्रति अपनी अनिच्छा जता दी। इसके बाद उनके दिल्ली जाने की अटकलों पर लगभग विराम लग गया। अब पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि राज्य सरकार उन्हें सेवा विस्तार देती है या फिर नए मुख्य सचिव की नियुक्ति करती है। यदि श्रीनिवास का सेवा विस्तार नहीं होता है तो सचिवालय में चल रही चर्चाओं के अनुसार मुकाबला मुख्य रूप से अभय कुमार और अखिल अरोड़ा के बीच माना जा रहा है। हालांकि मुख्य सचिव का चयन केवल वरिष्ठता या प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नहीं होता। मुख्यमंत्री की कार्यशैली, सरकार की प्राथमिकताएं, आने वाले वर्षों की रणनीति तथा केंद्र के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की क्षमता भी इस निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राज्य सरकार के सामने अगले दो वर्षों में कई बड़ी चुनौतियां हैं। फ्लैगशिप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश को आकर्षित करना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना, प्रशासनिक सुधारों को गति देना तथा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी, इन सभी मोर्चों पर सरकार को एक ऐसे मुख्य सचिव की आवश्यकता होगी, जो केवल फाइलों के प्रबंधन तक सीमित न रहे, बल्कि योजनाओं को धरातल पर परिणाम में बदल सके।
यही कारण है कि सरकार ऐसे अधिकारी की तलाश में होगी, जो नौकरशाही का मात्र मुखिया नहीं, बल्कि सरकार का प्रभावी क्रियान्वयनकर्ता साबित हो। ऐसा प्रशासक जो राजनीतिक नेतृत्व की प्राथमिकताओं को प्रशासनिक दक्षता के साथ जोड़ते हुए सरकार के विजन को समयबद्ध और परिणामोन्मुख तरीके से लागू कर सके। सत्ता के गलियारों में यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार अब दिल्ली में पहले की तुलना में अधिक परिणामोन्मुख और प्रभावी सरकार के रूप में अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में शीर्ष नौकरशाही की कमान ऐसे अधिकारी को सौंपे जाने की संभावना अधिक है, जो सरकार की विकास योजनाओं को गति देने के साथ-साथ उसकी प्रशासनिक साख को भी मजबूत कर सके। फिलहाल सबसे अधिक चर्चा सेवा विस्तार को लेकर है। यदि सरकार वी. श्रीनिवास के अनुभव पर भरोसा जताती है तो उन्हें एक्सटेंशन मिल सकता है लेकिन यदि नया चेहरा चुना जाता है तो प्रशासनिक हलकों में अखिल अरोड़ा का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी शांत, संतुलित और बिना किसी प्रचार-प्रसार के परिणाम देने वाली कार्यशैली मानी जा रही है। वित्तीय मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ और विभिन्न सरकारों के साथ समान रूप से काम करने की क्षमता उन्हें अलग पहचान देती है। यही कारण है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद वे वर्तमान सरकार और केंद्र के साथ भी बेहतर तालमेल रखने वाले अधिकारी माने जाते हैं। दूसरी ओर, अभय कुमार भी ईमानदार छवि, प्रशासनिक अनुभव और संतुलित निर्णय क्षमता वाले अधिकारी के रूप में सम्मानित हैं। इसलिए अंतिम निर्णय केवल व्यक्तिगत छवि पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार आने वाले समय की चुनौतियों के लिए किस प्रकार के नेतृत्व को अधिक उपयुक्त मानती है। फिलहाल सचिवालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है लेकिन अंतिम तस्वीर अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही साफ होगी। तब यह तय होगा कि सरकार वी. श्रीनिवास के अनुभव और बेहतर प्रदर्शन को एक और अवसर देती है, अभय कुमार पर भरोसा जताती है या फिर अखिल अरोड़ा की प्रशासनिक और वित्तीय दक्षता पर दांव खेलती है। इतना तय है कि राजस्थान के अगले मुख्य सचिव का चयन केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं होगा, बल्कि आने वाले वर्षों की शासन शैली और राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा।

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