नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि आज के दौर में मोबाइल फोन और माइक्रोफोन लेकर कोई भी स्वयं को पत्रकार बताने लगता है, जबकि कई लोगों के पास न तो पत्रकारिता का आवश्यक प्रशिक्षण होता है और न ही उनके कार्यों की कोई स्पष्ट जवाबदेही होती है। हाईकोर्ट ने कहा कि समय की मांग है कि सरकार ऐसा प्रभावी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करे, जिससे एक ओर प्रेस की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे और दूसरी ओर फर्जी, गैर-जिम्मेदाराना तथा डराने-धमकाने वाली पत्रकारिता पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। अदालत की इस टिप्पणी ने डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को लेकर जवाबदेही तथा विश्वसनीयता की आवश्यकता पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
मोबाइल रखने वाला हर शख्स खुद को पत्रकार मान रहा है: दिल्ली हाईकोर्ट
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July 18, 2026
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