पीपल बनाम खेजड़ी के पौधे के पीछे की सियासत

AYUSH ANTIMA
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पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का विवादो से गहरा नाता रहा है। यह परियोजना आग लगने के कारण विवादों में रही थी, घटिया गुणवत्ता वाले उपकरणो जैसे सस्ती कार्बन स्टील, फेल हुए आटोमेटिक वाल्व व टेस्टिंग में लापरवाही के कारण भीषण आग की चपेट में आ गया था। यह घटना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित उद्धघाटन से ठीक एक दिन पहले हुई थी। अब जब दुबारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्धघाटन करने आये तो इस दौरान उन्होंने एक पीपल का पौधा लगाने के बाद उसे खेजड़ी का बताया और राजस्थान में इस राज वृक्ष को लेकर पर्यावरण संबंधी महत्व का उल्लेख भी किया था। इसको लेकर विपक्ष हमलावर रहा कि किसानों की बात करने वाले व खुद को किसान बताने वाले मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को खेजड़ी और पीपल के पौधे में ही भेद नहीं कर पाए। 
पचपदरा रिफाइनरी के उद्धघाटन कार्यक्रम मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधारोपण कर खेजड़ी का पौधा लगाया लेकिन जो पौधा लगाया गया वह पीपल का था। इस आयोजन को लेकर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के मंत्रालय पर पर्यावरण संबंधी कार्यक्रमों और प्रोटोकॉल के प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, जिससे इस चूक के कारण भूपेन्द्र यादव पर भी सवालिया निशान खड़े हो गये है। सोशल मीडिया पर लोगों ने व विपक्ष ने तस्वीर के जरिए दावा किया कि यह पौधा पीपल का था। अपनी भूल को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को इस पोस्ट को डिलिट करनी पड़ी। इसके तुरंत बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के मंत्रालय से उनके चार करीबी अधिकारियों को अचानक हटा दिया गया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की जग हंसाई को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय नाराज हैं व आगामी क्या कार्यवाही होगी उसका भी इंतजार है। विदित हो राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार में भूपेंद्र यादव का सीधा दखल भी देखने को मिलता है। वैसे भूपेंद्र यादव की संगठन पर अच्छी पकड़ है और प्रधानमंत्री की इस चूक को लेकर भूपेंद्र यादव पर भी गाज गिर सकती है।

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