पीपलू/टोंक (लालचंद माली): उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत गहलोद के गाँव मारखेड़ा बैरवा की ढाणी में सार्वजनिक रास्तों पर हुए कथित अतिक्रमण ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं, मानो गाँव की सड़कों और रास्तों पर अब आम लोगों का नहीं, बल्कि कब्जाधारियों का अधिकार पत्र जारी हो गया हो। खेतों तक जाने वाले मुख्य रास्ते और सरकारी तालाब के मार्ग पर किए गए कथित कब्जों के कारण किसानों और ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
*किसानों का कृषि कार्य हुआ प्रभावित*
ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता वर्षों से खेतों तक पहुँचने का प्रमुख मार्ग रहा है, लेकिन अब किसानों को अपने ही खेतों तक जाने के लिए लंबी दूरी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और कृषि उपकरणों को ले जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लग रहा है जैसे खेती से पहले अब रास्ता खोजने की परीक्षा पास करनी पड़ रही हो।
*तालाब का रास्ता भी हुआ संकरा*
केवल खेतों तक ही नहीं, बल्कि गाँव के सरकारी तालाब तक पहुँचने वाला सार्वजनिक मार्ग भी कथित अतिक्रमण की चपेट में आ गया है। इससे पशुपालकों, ग्रामीणों और आमजन को तालाब तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जों के कारण गाँव में विवाद की स्थिति भी बनने लगी है।
*ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार*
पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार निवेदन करने के बावजूद कथित अतिक्रमणकारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सार्वजनिक रास्तों और तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।