निवाई (लालचंद माली): राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार संचालित ग्रामीण सेवा शिविरों के तहत टोंक जिले की करेड़ा बुजुर्ग ग्राम पंचायत में महिला अधिकारिता विभाग ने बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा कानूनों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में छात्राओं को महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकार, बालिका कल्याण योजनाओं तथा सहायता सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महिला अधिकारिता विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती मीरा चौधरी ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं का अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ प्रत्येक पात्र महिला और बालिका तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ" अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बालिकाओं की शिक्षा, पोषण, लैंगिक समानता, बाल विवाह की रोकथाम, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही छात्राओं से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005 की भी जानकारी दी गई। मीरा चौधरी ने बताया कि यह कानून महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, यौन एवं आर्थिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करता है। किसी भी प्रकार की प्रताड़ना की स्थिति में महिलाएं कानूनी सहायता लेकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकती हैं। जागरूकता अभियान के दौरान छात्राओं को टोंक जिला मुख्यालय स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर के बारे में भी विस्तार से बताया गया। उन्होंने जानकारी दी कि हिंसा से पीड़ित महिलाओं को यहां चिकित्सा सुविधा, अस्थायी आवास, मनोवैज्ञानिक परामर्श, विधिक सहायता, काउंसलिंग सहित अन्य आवश्यक सेवाएं 24 घंटे एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर संचालित महिला सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र की भूमिका, कार्यप्रणाली तथा महिला हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। छात्राओं से कहा गया कि किसी भी प्रकार की समस्या या उत्पीड़न की स्थिति में बिना झिझक संबंधित केंद्रों और हेल्पलाइन से संपर्क कर सहायता प्राप्त करें। कार्यक्रम के अंत में महिलाओं और बालिकाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने, अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने तथा सुरक्षित और सम्मानजनक समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया गया। विभाग ने बताया कि ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं तक विभागीय योजनाओं एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी पहुंचाने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।