20 दिन से मीटर बदलने का इंतजार, विभाग बोला– 'मीटर नहीं है'! जनता पूछे– फिर नियम किसके लिए

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर खराब होने के बाद विभाग से मीटर बदलवाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और आदेश जारी होने के बावजूद 20 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी नया मीटर नहीं लगाया जा रहा। इससे उपभोक्ताओं को हर माह एवरेज बिल का भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि विभाग द्वारा मीटर बदलने के लिए आवेदन करने के बाद आवश्यक राशि भी जमा करा दी गई, जिसकी रसीद भी उपलब्ध है। इसके बावजूद अधिकारी और कर्मचारी लगातार "मीटर उपलब्ध नहीं है" कहकर टालमटोल कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब विभाग स्वयं मीटर उपलब्ध नहीं करा पा रहा, तो इसका खामियाजा आम उपभोक्ता क्यों भुगते। जानकारों के अनुसार, राजस्थान विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस के तहत शिकायत दर्ज होने और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्धारित समय सीमा में मीटर बदलना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि विभाग निर्धारित अवधि में मीटर नहीं बदलता है तो यह सेवा में लापरवाही की श्रेणी में माना जाता है और उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति का भी अधिकार हो सकता है। मीटर समय पर नहीं बदलने से सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि बिल वास्तविक खपत के बजाय एवरेज आधार पर जारी किए जाते हैं। कई मामलों में बाद में नया मीटर लगने पर वास्तविक रीडिंग के आधार पर एकमुश्त भारी बिल थमा दिया जाता है, जिससे उपभोक्ता आर्थिक संकट में आ जाते हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग ने मीटर बदलने की समय सीमा तय कर रखी है, लेकिन क्षेत्र में इसका पालन नहीं हो रहा। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय बहानेबाजी की जा रही है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

*नियम क्या कहते हैं*

शिकायत दर्ज होने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद विभाग को निर्धारित समय सीमा में मीटर बदलना होता है। मीटर खराब होने की स्थिति में उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक एवरेज बिल पर नहीं रखा जा सकता। देरी होने पर उपभोक्ता संबंधित सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता, उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच तथा विद्युत लोकपाल तक शिकायत दर्ज करा सकता है। यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, जवाबदेही तय करना तथा नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार क्षतिपूर्ति जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान हो रहा है, उनके विरुद्ध विभाग तत्काल कार्रवाई करे, मीटरों की उपलब्धता सुनिश्चित करे और निर्धारित समय सीमा में सभी लंबित मीटर बदलवाए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।

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