रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): श्री भुज तपागच्छ जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित 'सिद्धिदायक सिद्धितप' अभियान के अंतर्गत श्रमणीगण नायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज साहेब का शनिवार को घनश्याम नगर आगमन हुआ। यहां श्रद्धालुओं ने उनका भावपूर्ण सामैया एवं स्वागत किया। इसके बाद 'केशव मंच्छा' भवन में आयोजित धर्मसभा में जैनाचार्यश्री ने प्रेरक प्रवचन देते हुए चातुर्मास की आराधना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक साधक को चातुर्मास में नौ आध्यात्मिक आभूषण धारण करने चाहिए। इनमें सामायिक, प्रतिक्रमण, पौषध, प्रभु पूजा, स्नात्र, विलेपन, ब्रह्मचर्य पालन, सुपात्र दान और तपस्या शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन नौ आभूषणों में तप सर्वोपरि है, क्योंकि तप से आत्मा निर्मल बनती है और सिद्धत्व की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। जैनाचार्यश्री ने 'हर घर सिद्धितप, घर-घर सिद्धितप' अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सिद्धपद की प्राप्ति के लिए सिद्धितप की आराधना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर अभियान से जुड़े बुकमार्क तथा गुरु मंत्र रिफ्लेक्टर की-चेन का गणमान्यजनों द्वारा अनावरण किया गया और प्रभावना स्वरूप उपस्थित श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। प्रवचन के पश्चात श्रद्धालुओं में पूज्य गुरु भगवंत का आशीर्वाद लेकर सिद्धितप पास प्राप्त करने के लिए विशेष उत्साह देखने को मिला। संघ की ओर से बताया गया कि रविवार को दोपहर 3:30 बजे श्री भुज तपागच्छ जैन संघ में "द बिगिनिंग ऑफ रामायण" विषय पर जैनाचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी महाराज का सार्वजनिक प्रवचन आयोजित होगा, जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों के शामिल होने की अपेक्षा है।
हर घर सिद्धितप अभियान को मिला उत्साहजनक प्रतिसाद, जैनाचार्य रश्मिरत्न सूरीजी ने बताया तप का महत्व
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July 18, 2026
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