कोटपूतली (ईशाक खान): निकटवर्ती ग्राम सांगटेड़ा स्थित आस्था के केंद्र ’‘पीला जोहड़’’ में सैकड़ों बेजुबान मछलियों की मौत के बाद हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आवाज उठाए जाने के बाद नगर परिषद के अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया। बुधवार शाम से ही नगर परिषद के सफाई कर्मचारी इस भीषण धूप में मुस्तैदी से जोहड़ में उतरकर मृत मछलियों को बाहर निकालने के कार्य में जुटे हुए हैं, जिसके लिए पूरा गांव प्रशासन का आभार व्यक्त कर रहा है। उल्लेखनीय है कि विगत बुधवार को आस्था और पर्यावरण के प्रतीक निकटवर्ती ग्राम सांगटेड़ा के ऐतिहासिक ’पीला जोहड़’ से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई थी। भीषण गर्मी और बढ़ते प्रदूषण के कारण यह पवित्र जलाशय बेजुबानों की कब्रगाह में तब्दील हो गया। जोहड़ का पानी इस कदर दूषित हो गया कि उसमें मौजूद सैकड़ों मछलियों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है एवं मछलियां मृत मिलने से क्षेत्र में चिंताजनक स्थिति बनी हुई हैं, पिछले 3-4 दिनों से जोहड़ में मछलियां मृत पड़ी हैं, जिन्हें हटाने एवं जोहड़ की सफाई की कार्यवाही की जा रही हैं।
*हाथों से सफाई संभव नहीं, गहरा है जोहड़*
मौके पर दोबारा स्थिति का जायजा लेने पहुंचे कांग्रेस एससी विभाग के जिलाध्यक्ष तारा पूतली ने बताया कि जोहड़ काफी बड़ा और गहरा है। सफाई कर्मचारी किनारे-किनारे से जितनी हो सके उतनी मृत मछलियां निकाल रहे हैं लेकिन जोहड़ के बीच में और उसकी तलहटी में अभी भी सैकड़ों मृत मछलियां दबी हुई हैं, जिन्हें सिर्फ हाथों से निकालना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
*पानी जहरीला होने का बढ़ा खतरा*
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि ये मृत मछलियां पानी के अंदर ही सड़ गईं, तो जोहड़ का पानी पूरी तरह से जहरीला हो जायेगा। इससे पानी में बची हुई अन्य जिंदा मछलियों और बेजुबान जानवरों के जीवन पर भी बड़ा संकट खड़ा हो जायेगा। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने नगर परिषद के अधिकारियों से निवेदन किया हैं कि जोहड़ की पूरी सफाई के लिए बड़े जाल या नाव का इस्तेमाल किया जायें। एक बार बड़ा जाल डालकर पूरे जोहड़ को अच्छे से खंगाला जायें, ताकि पानी के अंदर एक भी मृत मछली ना बचे। पानी को निर्मल और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर यह अभियान चलाया जायें। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ मछलियों का सवाल नहीं है, यह हमारी आस्था के ’पीला जोहड़’ और बेजुबानों के प्रति हमारे धर्म की रक्षा का मामला है। हमें पूरा भरोसा है कि नगर परिषद इस मुद्दे पर भी वैसी ही गंभीरता दिखाएगी जैसी उन्होंने पहले दिन दिखाई थी। जब तक जोहड़ में फिर से जीवन नहीं लहलहाएगा हमारा यह प्रयास जारी रहेगा।