जल धरोहर संरक्षण बना जन आंदोलन, शिव मंदिर तालाब बावड़ी पर जनसहभागिता से चला स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान

AYUSH ANTIMA
By -
0


कोटपूतली (ईशाक खान): ऐतिहासिक जल स्त्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता तथा जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं स्थानीय नगर परिषद द्वारा यूनिसेफ तथा बावड़ी बाईसा के सहयोग से शनिवार प्रातः शिव मंदिर तालाब बावड़ी (गंगासागर तालाब) कोटपूतली में विशेष जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। प्रातः 07.30 से 09 बजे तक चले इस अभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, भारत स्काउट एवं गाइड, एनसीसी, स्वच्छता सेवा दल, लायंस क्लब, पत्रकारों तथा बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर सामूहिक श्रमदान किया। अभियान के दौरान ऐतिहासिक बावड़ी परिसर में व्यापक स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गई तथा जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता से जुड़े संदेशों के माध्यम से आमजन को जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने श्रमदान कर यह संदेश दिया कि जल धरोहरों का संरक्षण केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिला कलक्टर अपर्णा गुप्ता ने कहा कि जल संरक्षण आज केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण दायित्व है। राजस्थान जैसे जल-संवेदनशील प्रदेश में प्रत्येक बूंद का संरक्षण आवश्यक है। हमारी ऐतिहासिक बावड़ियां, तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जल स्रोत केवल स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण नहीं हैं, बल्कि सदियों से जल प्रबंधन की समृद्ध भारतीय परंपरा के जीवंत प्रतीक रहे हैं। इनका संरक्षण करना हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से गिरते भू-जल स्तर, अनियोजित जल दोहन तथा बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा जल स्त्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं स्वच्छता के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसमें सहभागी बने। जब नागरिक स्वयं अपने आसपास स्थित तालाबों, बावड़ियों एवं अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तभी स्थायी परिवर्तन संभव होता है। जिला कलक्टर ने कहा कि श्रमदान केवल स्वच्छता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, सामूहिक चेतना और जनभागीदारी का सशक्त प्रतीक है। आज इस अभियान में युवाओं, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज जल संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल धरोहरों के संरक्षण का सतत जन आंदोलन है, जिसे प्रत्येक नागरिक के सहयोग से निरंतर आगे बढ़ाया जायेगा। उन्होंने आमजन से वर्षा जल संचयन को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जल स्त्रोतों में गंदगी एवं प्लास्टिक कचरा ना डालने तथा अपने गांव, मौहल्ले एवं शहर की पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर इसी प्रकार निरंतर प्रयास करते रहे तो ना केवल जिले की ऐतिहासिक जल धरोहरों का पुनर्जीवन होगा, बल्कि भू-जल स्तर में सुधार, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित जल भविष्य सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों, व्यापारिक संगठनों तथा युवाओं से आग्रह किया कि वे समय-समय पर आयोजित ऐसे श्रमदान एवं स्वच्छता अभियानों से जुड़कर जल संरक्षण को जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बनायें। एडीएम ओमप्रकाश सहारण ने कहा कि राजस्थान की बावड़ियां केवल जल संग्रहण संरचनाएं नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। वर्षों पूर्व निर्मित इन जल स्रोतों ने जल संकट के समय समाज को संबल प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए इन पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन अत्यंत आवश्यक है। यदि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जाए तथा बावड़ियों, तालाबों एवं अन्य जल स्त्रोतों को स्वच्छ एवं संरक्षित रखा जाए तो भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है। प्रत्येक नागरिक, सामाजिक संस्था, युवा एवं विद्यार्थी यदि अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो जल संरक्षण एक प्रभावी जन आंदोलन का रूप ले सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। बावड़ी बाईसा अभियान की संयोजक आकांक्षा मोदी ने कहा कि बावड़ियां हमारी सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक जीवन और जल प्रबंधन की प्राचीन एवं वैज्ञानिक परंपरा की प्रतीक हैं। इनका संरक्षण केवल पुरातात्विक धरोहर बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी जल संरक्षण अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने आसपास स्थित जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक होकर योगदान दे तो भू-जल स्तर में सुधार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी प्रभावी रूप से पूरा होगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं एवं नागरिकों से नियमित रूप से ऐसे श्रमदान अभियानों से जुड़कर जल धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ.राकेश शर्मा ने शिव मंदिर तालाब बावड़ी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक जल संरचनाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, भारत स्काउट एवं गाइड, जिला प्रशासन, नगर परिषद के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए जनसहभागिता को बढ़ावा दिया। प्रशासन ने जिले के नागरिकों, विद्यार्थियों, व्यापारिक संस्थानों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संगठनों से भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी अभियानों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने की अपील की। प्रशासन ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का छोटा-सा योगदान भी स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ कोटपूतली के निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस दौरान एसीईओ गोपाल लाल मीणा, नगर परिषद आयुक्त अरुण शर्मा, नगर परिषद के अधिकारी, कर्मचारी, सफाईकर्मी, स्वच्छता सेवा दल के प्रवीण बंसल, लायंस क्लब के कमल किशोर, यूनिसेफ की प्रतिनिधि पूनम मीणा, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, पत्रकारगण तथा बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!