पवनपुरी का होटल राजदरबार बिना फायर एनओसी, तंग सीढ़ियां, बंद कमरे में हो रहा संचालित, प्रशासन की अनदेखी से उठ रहे सवाल

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): शहर के पवनपुरी क्षेत्र में संचालित होटल राजदरबार सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है। बिना फायर एनओसी, तंग निकासी मार्ग और अग्निशमन यंत्रों के अभाव के कारण यह होटल किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

*क्या हैं खामियां* 
जानकारी के अनुसार दो मंजिला इस होटल में कुल 16 कमरे हैं। होटल का मेन गेट बेहद संकरा है। अंदर बनी सीढ़ियां भी बहुत कम जगह में और तंग हैं। ज्यादातर कमरों में खिड़की नहीं है। होटल में एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं है और रिसेप्शन सीढ़ियों के नीचे छोटी जगह में बना है।

*नियम क्या कहते हैं*  
राष्ट्रीय भवन संहिता-2016 और राजस्थान फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेफ्टी एक्ट के अनुसार किसी भी होटल को संचालित करने से पहले फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। इसमें पर्याप्त चौड़े निकासी मार्ग, अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म, इमरजेंसी लाइट और खिड़की/वेंटिलेशन की व्यवस्था जरूरी है। एनओसी के बिना होटल चलाना दंडनीय अपराध है और हादसे की स्थिति में होटल संचालक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है।

*पहले भी हो चुके हादसे*  

भूतकाल में बिना सुरक्षा इंतजाम वाले होटलों में कई दुखद घटनाएं हो चुकी हैं। 2019 में दिल्ली के करोलबाग स्थित अर्पित होटल में आग लगने से 17 लोगों की मौत हुई थी। जांच में सामने आया था कि होटल में निकासी का रास्ता तंग था और अग्निशमन यंत्र नहीं थे। 2018 में मुंबई के कमला मिल्स में आग से 14 लोगों की जान गई थी। इन हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी होटलों में फायर सेफ्टी को अनिवार्य किया था।

*प्रशासन की भूमिका पर सवाल*  
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना एनओसी और सुरक्षा के बावजूद होटल राजदरबार लंबे समय से संचालित हो रहा है। फायर विभाग और नगर निगम की ओर से कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण ही ऐसे होटल बेखौफ चल रहे हैं।

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