पावटा (राहुल शर्मा): केंद्र सरकार द्वारा एनसीआर के विस्तार में कोटपूतली, पावटा और विराट नगर तहसीलों को शामिल नहीं किए जाने से क्षेत्र में आक्रोश है। 2 जुलाई 2026 को भारत के राजपत्र में जारी अधिसूचना में कोटपूतली-बहरोड़ जिले की केवल 5 तहसीलों को ही एनसीआर में जगह मिली है। इसे लेकर स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे विकास के साथ धोखा करार दिया है।
*भविष्य में मेट्रो-रैपिड रेल से वंचित रह जाएंगे: राकेश मीणा*
पूर्व वार्ड पार्षद राकेश मीणा ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि अगर अभी पावटा, विराट नगर और कोटपूतली को एनसीआर में नहीं जोड़ा गया तो आने वाले समय में हम मेट्रो, रैपिड रेल और एनसीआर की विशेष फंडिंग जैसी सुविधाओं से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बहरोड़ नीमराना को एनसीआर में डालकर औद्योगिक विकास की तरफ मोड़ा जा रहा है, लेकिन कोटपूतली बेल्ट को जान बूझकर पीछे धकेला जा रहा है।
*लाडाबास औद्योगिक है, फिर भी बाहर क्यों*
पावटा कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रभारी नरेश बंसल ने कहा कि एक तरफ सरकार लाडाबास को औद्योगिक क्षेत्र बताकर प्रचार करती है, दूसरी तरफ एनसीआर से बाहर रखकर यहां के विकास की गति को रोक रही है। पावटा कपड़ा व्यापार संघ के अध्यक्ष धर्मेन्द्र गोयल ने कहा कि एनसीआर में बहुत सी सुविधाएं आती हैं। हमें उनसे बाहर रखकर आने वाले समय में विकास पर अंकुश लगाया जा रहा है। लाडाबास में हजारों लोग काम करते हैं, फिर भी उसे नजरअंदाज किया गया।
*चुनाव में आते हैं, मुद्दे पर चुप क्यों: नेताओं ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए*
कोटपूतली, पावटा, विराट नगर में राजनीति करने के लिए नेता बहुत हैं। चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन आज एनसीआर जैसे बड़े मुद्दे पर सब चुप क्यों हैं। डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद हमारे क्षेत्र को वंचित रखा जा रहा है।
*लोगों की मुख्य मांगें*
1. तुरंत प्रस्ताव भेजा जाए: राज्य सरकार केंद्र को संशोधित प्रस्ताव भेजकर तीनों तहसीलों को एनसीआर में शामिल कराए।
2. लाडाबास को जोड़ो: औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण लाडाबास को प्राथमिकता के आधार पर एनसीआर में जोड़ा जाए।
3. विकास में भेदभाव बंद हो: एनसीआर की योजनाओं का लाभ जिले की सभी तहसीलों को समान मिले।
*क्या होगा नुकसान: एनसीआर में नहीं होने से इस क्षेत्र को*
केंद्र की विशेष फंडिंग नहीं मिलेगी, मेट्रो, RRTS और हाईवे प्रोजेक्ट यहां नहीं आएंगे, औद्योगिक निवेश बहरोड़-नीमराना की तरफ शिफ्ट हो जाएगा, रोजगार के अवसर कम होंगे।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो तीनों तहसीलों के सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर जनप्रतिनिधियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगे, जनता के हित के लिये।