रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): कच्छ जिला के श्री भुज शहर में स्थित वाणियावाड डेला श्री तपागच्छ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में पूज्यपाद 451 दीक्षादानेश्वरी आचार्य श्री गुणरत्नसूरीश्वरजी के कृपापात्र, कच्छ में जगह-जगह शास्त्रीय सामायिक की अलख जगाने वाले श्रमणीगणनायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्नसूरीश्वरजी आदि 36 साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में 498 शिष्याओं की गुरुमाता प्रवर्तिनी साध्वीश्री पुण्यरेखाश्रीजी (बहेन महाराज) के संयम जीवन के 50 वर्ष पूर्णाहुति पर श्री भुजतपागच्छ संघ और गुरुभक्तों की ओर से ता. 6 और 7 जुलाई सोमवार-मंगलवार दो दिवसीय भव्यातिभव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। संघ प्रमुख श्री कीर्तिभाई ने सोमवार के कार्यक्रम का विवरण देते हुए बताया कि सुबह 8 बजे बाजे-गाजे के साथ सामैया (स्वागत) पूर्वक गुरु भगवंतों का प्रवेश होगा। इसके बाद नूतन उपाश्रय में "संयम रंग लाग्यो" विषय पर प्रवचन होगा। दोपहर में बहनें पंचकल्याणक पूजा पढ़ाएंगी। युवा ट्रस्टी श्री राजन भाई और पारस भाई ने मंगलवार के मुख्य कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सुबह 8 बजे 'पुष्पपुण्यसुवासः संयमना संगे, स्वर्णोत्सव ना रंगे' संगीतमय कार्यक्रम आयोजित होगा। मुमुक्षु आशि (साबरमती) और मुमुक्षु आयुषी (डोम्बिवली) 500 तथा 501वीं शिष्या बनने का मुहूर्त ग्रहण करेंगी। 700 वर्ष पूर्व साध्वी पद्मश्री की 700 शिष्याएँ थीं, उसके बाद यानी 700 वर्ष बाद किसी एक साध्वी की 501 शिष्याएँ बन रही हैं। दोपहर में बहनों की सामायिक आयोजित होगी।
इससे पूर्व रविवार को भुज आराधना भवन जैन संघ में पूज्य आ. भ. आनंदवर्धनसूरीश्वरजी तथा पूज्य आ. भ. आत्मदर्शनसूरीश्वरजी के भव्य चातुर्मास प्रवेश प्रसंग पर आचार्य रश्मिरत्नसूरीश्वरजी ने निश्रा (सान्निध्य) प्रदान की थी।