बीकानेर (मुकेश रामावत): लोन वसूली के नाम पर बैंकों और निजी फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंट अब कानून और आरबीआई की गाइडलाइन को ताक पर रखकर धमकाने पर उतर आए हैं। एक ताजा मामले में "मनी व्यू" नाम की फाइनेंस कंपनी के एजेंट द्वारा भेजे गए मैसेज ने वसूली के तरीके पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भेजे गए मैसेज में साफ लिखा है कि अगर आपको अपनी इज्जत प्यारी है तो मनी व्यू की पेमेंट करो वरना अब हम आपके रिश्तेदार, पडौसी सबके पास कॉल करेंगे। यानी अगर इज्जत प्यारी है तो पैसा दो वरना रिश्तेदारों और पड़ोसियों को कॉल करके बदनाम किया जाएगा।
*आरबीआई की गाइडलाइन क्या कहती है*
आरबीआई के फेयर प्रैक्टिस कोड और डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइन के अनुसार रिकवरी एजेंट कर्जदार से सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं। किसी तीसरे व्यक्ति, रिश्तेदार या पड़ोसी को कर्ज की जानकारी देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। धमकाना, गाली देना, बार-बार कॉल करना या सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है।
*कानून का उल्लंघन*
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मैसेज आईपीसी की धारा 384 - जबरन वसूली और आईटी एक्ट के तहत साइबर धमकी की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी पहले कह चुका है कि कर्ज वसूली का मतलब कर्जदार की गरिमा पर हमला नहीं हो सकता।
*बढ़ रहे मामले*
पिछले कुछ समय से निजी फाइनेंस ऐप और एनबीएफसी की वसूली को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। एजेंट कर्जदार के कॉन्टैक्ट लिस्ट का गलत इस्तेमाल कर उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और ऑफिस में कॉल करके मानसिक दबाव बनाते हैं। कई मामलों में आत्महत्या तक की नौबत आ चुकी है।
*प्रशासन से कार्रवाई की मांग*
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि आरबीआई और पुलिस को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। कर्जदारों से अपील है कि धमकी भरे मैसेज या कॉल का स्क्रीनशॉट लेकर नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं और आरबीआई के शिकायत पोर्टल http://cms.rbi.org.in पर भी रिपोर्ट करें।
फिलहाल मनी व्यू कंपनी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि लोन वसूली के नाम पर आम लोगों को किस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है।