चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शासकीय चिकित्सक और सामाजिक सरोकार एक दूसरे के पर्याय हैं। चिकित्सा का पेशा एक नौकरी ही नहीं बल्कि समाजसेवा का एक बड़ा माध्यम भी है। एक सरकारी डॉक्टर विशेष रूप से ग्रामीण व पिछडे इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होता है। उनका प्राथमिक कर्तव्य आमजन को सस्ती, सुलभ और गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवाये पहुंचाना है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, ऐसे में सरकारी डॉक्टर का संवेदनशील व्यवहार और सही इलाज व सभी जांच मुफ्त व एक छत के नीचे व्यवस्था करवाना भी सरकारी डॉक्टर का ध्येय होना चाहिए।
उपरोक्त सभी गुणों को अपने व्यवहारिक जीवन में अंगीकार कर चिड़ावा उप जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ.नितिश कुमार जांगिड़ नर सेवा नारायण के भाव से अनवरत चिड़ावा व आसपास के ग्रामीणजनों की सेवा अनवरत कर रहे हैं। सरकारी डॉक्टर को सरकार पैसे देती है व उसको आमजन की तकलीफों से कोई सरोकार नहीं रहता, ऐसा देखा गया है लेकिन डॉ.जांगिड़ ने इस मिथक को तोड़ते हुए मानव धर्म को सर्वोपरि मानते हुए चिड़ावा के उप जिला अस्पताल में बीएसओ यानी बायलैटरल सेल्पिंगो ओफरोकटामी जो एक महिलाओं के लिए एक जटिल सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमे महिला के दोनों अंडाशयों और फैलोपियन ट्यूब को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। डॉ.जांगिड़ के अथक प्रयासों से इस जटिल शल्य चिकित्सा चिड़ावा के सरकारी उप जिला अस्पताल मे संभव हो पाई, जो करीब दो वर्षों से लंबित थी। उन्हीं के व्यक्तिगत प्रयासों से ब्लड स्टोरेज यूनिट का लाईसेंस भी चिड़ावा उप जिला अस्पताल को जयपुर से मिला, जिससे खून की कमी और किसी सिरियस एक्सीटेंड में खून के लिए मरीज के परिजनों को परेशानी से छुटकारा मिला। सरल स्वभाव के व्यक्तित्व के धनी डॉ.जांगिड़ का मृदुभाषी स्वभाव उनको और सामाजिक सरोकार करने को प्रेरित करता है। उनके इसी स्वभाव ने भामाशाहों को आकर्षित किया और उनके माननीय मूल्यों की प्रेरणा से करीब तीन लाख रुपये के डी फ्रीज की व्यवस्था हो पाई, जो किसी मृत बाडी के रखने के लिए कारगर व्यवस्था है। करीब चार लाख रूपये की लागत से अस्पताल परिसर में बना टीन शेड इस बात का गवाह है कि मरीजों के साथ आए परिजनों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में डॉक्टर जांगिड़ कितने संवेदनशील है।