निवाई (लालचंद माली): सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग जहां प्रवेशोत्सव चलाकर बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। ग्राम पंचायत दहलोद के पीईईओ क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, दयालपुरा में स्वीकृत चार शिक्षकों में से केवल दो शिक्षक ही विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए उपलब्ध हैं। इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार एक शिक्षक कृष्ण अवतार सैनी 15 मई से प्राथमिक शिक्षा कार्यालय, टोंक में डेपुटेशन पर कार्यरत हैं, जबकि दूसरे तृतीय श्रेणी शिक्षक प्रतियोगी परीक्षा में आरक्षित वीक्षक के रूप में ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय, निवाई में लगाए गए हैं। ऐसे में विद्यालय का पूरा संचालन केवल दो शिक्षकों के भरोसे रह गया है। संस्था प्रधान धीरज सिंह सोलंकी ने बताया कि उन्हें शिक्षण के साथ-साथ संस्था प्रधान का प्रशासनिक दायित्व, मिड-डे मील व्यवस्था, ऑनलाइन कार्य, पत्राचार और विभागीय बैठकों में भी समय देना पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है। हालात इतने गंभीर हैं कि अभिभावक अपने बच्चों की टीसी कटवाकर अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिला रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक ओर विभाग नामांकन बढ़ाने के लिए विद्यालयों पर दबाव बना रहा है और कम नामांकन पर कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को लंबे समय से डेपुटेशन और गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। ग्रामीणों ने इस समस्या को प्रशासनिक शिविर में भी प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद संस्था प्रधान ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित पत्र भेजकर डेपुटेशन पर लगे शिक्षकों को वापस भेजने की मांग की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे न केवल विद्यार्थियों का नामांकन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनकी पढ़ाई भी लगातार बाधित हो रही है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से तत्काल शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा डेपुटेशन पर भेजे गए शिक्षकों को विद्यालय में वापस लगाने की मांग की है, ताकि बच्चों का भविष्य प्रभावित होने से बचाया जा सके।
सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब, दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा पूरा विद्यालय; डेपुटेशन व्यवस्था ने बिगाड़ी पढ़ाई
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July 14, 2026
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