मोह ही है जन्म-मरण के चक्र का मूल कारण, आत्मस्वरूप की पहचान से ही संभव है मोक्ष: आर्यिका विज्ञाश्री

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित धर्मसभा में आध्यात्मिक वातावरण छा गया। धर्मसभा से पूर्व श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने माताजी के प्रेरणादायी प्रवचनों का श्रवण कर आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने कहा कि संसार परिभ्रमण का मुख्य कारण केवल मोह है। जब तक जीव मोहनीय कर्मों के बंधन में बंधा रहता है, तब तक वह जन्म-मरण के अंतहीन चक्र से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोह का अर्थ केवल किसी वस्तु या व्यक्ति से प्रेम करना नहीं, बल्कि उसमें इतना लीन हो जाना है कि मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप, अपने आत्मधर्म और अपने अस्तित्व को ही भूल जाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने स्वभाव और मूलधर्म को छोड़कर बाहरी पदार्थों, संबंधों और भौतिक सुखों को ही अपना सर्वस्व मान बैठता है। यही मोह उसे संसार के बंधनों में जकड़े रखता है। जो व्यक्ति अपने वास्तविक आत्मस्वरूप को पहचान लेता है और आत्मा के अतिरिक्त समस्त पदार्थों को पर मानता है, वही मोक्ष का अधिकारी बनता है। आत्मचिंतन, संयम और वैराग्य ही मोक्ष का सच्चा मार्ग है। मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा ने बताया कि श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी में 21 से 29 जुलाई तक आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, विधान, धार्मिक प्रवचन, पूजन एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। आयोजन को लेकर समिति एवं समाज के पदाधिकारी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। क्षेत्र में इस धार्मिक महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह का माहौल है तथा बड़ी संख्या में धर्मावलंबियों के शामिल होने की संभावना है।

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