सिद्ध समाज की मांग: ओबीसी गणना में अलग पहचान या जाट के साथ जोड़ने की गुहार, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

AYUSH ANTIMA
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श्रीडूंगरगढ़/बीकानेर (मुकेश रामावत): राज्य में चल रही अन्य पिछड़ा वर्ग की गणना के बीच श्रीडूंगरगढ़ में सिद्ध समाज ने अपनी पहचान को लेकर आवाज उठाई है। समाज के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि ओबीसी की ऑनलाइन सूची में सिद्ध जाति को शामिल किया जाए। समाज का कहना है कि वर्तमान गणना की सूची में सिद्ध जाति का नाम नहीं है, जिसके कारण उन्हें ओबीसी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रतिनिधियों ने बताया कि सिद्ध समाज मूलतः जाट जाति से जुड़ा हुआ है और जाटों के 41 गोत्रों में सिद्ध भी शामिल है। ज्ञापन में दो विकल्प रखे गए हैं। या तो सिद्ध जाति को ओबीसी सूची में अलग से क्रमांक दिया जाए, या फिर इसे जाट जाति के साथ ही जोड़ा जाए। समाज ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा सिद्धों की गिनती नाथ-जोगी वर्ग के साथ करवाने का प्रयास गलत है।
यह ज्ञापन राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मदन लाल भाटी के नाम सौंपा गया। इस दौरान ओशो जिज्ञासु सिद्ध, पुरनाथ सिद्ध सहित समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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