प्रजातांत्रिक व्यवस्था में पंचायत व स्थानीय निकायों के चुनाव टालना सैध्दांतिक रूप से अनुचित व अलौकतान्त्रिक है। यह जमीनी स्तर पर सत्ता के विकेन्द्रीकरण को रोकता है और स्थानीय स्तर पर अफसरशाही को हावी होने मे सहायक होता है। प्रजातांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए पंचायत व नगर निकाय के चुनाव निर्धारित समय पर होने चाहिए। उपरोक्त तथ्यों को राजस्थान के संदर्भ में देखें तो डबल इंजन सरकार ने आमजन के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने का काम किया कि पंचायत व नगर निकाय चुनावों को लेकर सरकार ओबीसी आयोग के दामन में छिपकर चुनावों से भाग रही थी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का अपने मंत्रियों पर कोई नियंत्रण न होने के कारण हर रोज चुनावों को लेकर बयानबाजी करते रहे कि सरकार चुनावों के लिए तैयार है परन्तु चुनाव करवाना चुनाव आयोग का काम है। राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव करवाने को लेकर रोड मैप तैयार किया है। सरकार ने अदालत में हलफनामा देकर स्पष्ट किया कि 15 नवम्बर तक हर हाल में स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव सम्पन्न करवा लिए जायेंगे। ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। आयोग की रिपोर्ट के बाद 15 अगस्त तक सभी वार्डों के आरक्षण और लाटरी की प्रकिया पूरी की जायेगी। नगर निकाय चुनावों की घोषणा 17 अगस्त को की जायेगी, जिसके बाद सितम्बर तक मतदान की प्रक्रिया होने की संभावना है। पंचायत चुनावों की घोषणा 23 सितंबर को की जायेगी और मतदान अक्टूबर-नवम्बर में प्रस्तावित है। कोर्ट द्वारा बार बार समय सीमा बढ़ाने की मांग पर जताई गई नाराजगी के कारण सरकार ने उपरोक्त निश्चित कार्यक्रम पेश किया। राज्य सरकार के शपथ पत्र को रिकार्ड पर लेते हुए अदालत ने कहा कि इसके बाद सरकार को चुनाव कराने का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि चुनावों से भागने के पीछे भजन लाल शर्मा सरकार की मंशा आखिर क्या थी, क्यों उनके मंत्री इन चुनावों को लेकर विरोधाभासी बयानबाजी करते रहे। इन्हीं चुनावों को लेकर भाजपा संभाग स्तर पर संगठनात्मक बैठक कर संगठन को मजबूत करने का काम कर रही है। जयपुर संभाग की बैठक जयपुर में न होकर खाटूश्यामजी में की गई। यदि झुंझुनूं जिले की बात करें तो जिले का संगठनात्मक ढांचा एक पूर्ण सांसद के इशारे पर चलने के कारण आईसीयू में है। वैसे भी जिले में भाजपा की स्थिति कोई खास नहीं है, इसके साथ ही संगठन में पुराने नेताओं को तवज्जो न देकर आयातित नेताओं को तवज्जो देना कोढ में खाज का काम कर रहा है। सरकार व संगठन में तालमेल का अभाव है। यह अभाव यमुना जल समझोते को लेकर जयपुर में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के अभिनंदन समारोह में देखने को मिला, जब जिलाध्यक्ष ने नवलगढ़ विधायक का मंच से नाम लेना ही उचित नहीं समझा। इसको लेकर विधायक ने अपमान महसूस करते हुए अपने समर्थकों के साथ आयोजन स्थल से दूरी बना ली थी लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बीच बचाव से मामला शांत हुआ। हालांकि हाईकोर्ट के चाबुक के चलते चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है लेकिन परिणाम किसके पक्ष में होगे, यह प्रश्न समय की गर्त में छिपा हुआ है।
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