दौसा (गोवर्धन लाल वर्मा): सरकार के "विकसित राजस्थान" और "धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा" के दावे गेटोलाव धाम की जर्जर सड़क पर आकर दम तोड़ रहे हैं। शहर से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित आस्था के इस केंद्र तक जाने वाली सड़क मानसून आते ही पूरी तरह से तालाब में तब्दील हो गई है। न सड़क दिख रही है, न व्यवस्था।
*श्रद्धालुओं की आस्था, प्रशासन की लापरवाही*
हर महीने पूर्णिमा और अमावस्या पर गेटोलाव धाम पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दूर-दराज के गांवों, कस्बों से लोग पैदल, बाइक से दर्शन को आते हैं लेकिन उन्हें इसी कीचड़, गड्ढों और भरे पानी से जूझते हुए मंदिर तक पहुंचना पड़ रहा है। तस्वीर में साफ देख सकते है कि कैसे बाइक सवार बीच सड़क में फंसकर गिर रहे हैं। एक श्रद्धालु का सामान भी पानी में बह गया। बुजुर्ग और महिलाएं लाठी के सहारे किसी तरह जान जोखिम में डालकर दर्शन को जा रहे हैं।
*"टैक्स लेते हैं, सुविधा नहीं देते"*
स्थानीय ग्रामीणों में गुस्सा है। गांव वालों का कहना है कि हम टैक्स भी देते हैं, वोट भी देते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधा के नाम पर हमें जीरो मिला है। बरसात में 4 महीने तो इस रास्ते से निकलना ही मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि हर बार चुनाव से पहले नेता बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं, फीता काटने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सुध लेने नहीं आता। पीडब्ल्यूडी विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन फाइलें धूल खा रही हैं।
*सवालों के घेरे में सिस्टम*
1. करोड़ों रुपये के सड़क बजट का आखिर हो क्या रहा है।
2. धार्मिक स्थल को जोड़ने वाली सड़क को प्राथमिकता में क्यों नहीं रखा जा रहा।
3. क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे और जनहानि का इंतजार कर रहा है।
*जनप्रतिनिधि भी मौन*
हैरानी की बात ये है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। न कोई निरीक्षण, न कोई आश्वासन। नतीजा ये कि हर साल यही हालात दोहराए जा रहे हैं। हां, हाल ही में स्थानीय दौसा विधायक डीसी बैरवा ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शहर की सड़कों की मरम्मत करने हेतू ज्ञापन दिया था लेकिन अब तक मरम्मत का कार्य शुरू नही किया गया है।
*स्थानीय लोगों की चेतावनी*
स्थानीय लोगों ने जिला कलेक्टर व पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से 15 दिन के भीतर सड़क की मरम्मत और पक्की नाली निर्माण की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो श्रद्धालुओं के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। अब देखना ये है कि प्रशासन कब नींद से जागता है, या फिर किसी अनहोनी के बाद ही जागेगा।