रोका... देखा... फिर छोड़ दिया: झिंकरे के डंपरों पर वन विभाग की 'मेहरबानी' या कोई बड़ा खेल

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): दशहरा मैदान के पास झिंकरे (मलबा) से भरे दो डंपरों को वन विभाग द्वारा रोकने और कुछ देर बाद छोड़ देने का मामला अब सवालों के घेरे में है। पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की कार्यप्रणाली के साथ-साथ पुलिस, खनिज एवं परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और अधिकारियों के दावों में इतना बड़ा विरोधाभास क्यों दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार वन विभाग के रेंजर धारीलाल बैरवा ने दशहरा मैदान के पास झिंकरे से भरे दो डंपरों को रोककर उनकी जांच की और बाद में यह कहते हुए छोड़ दिया कि दोनों वाहन कोलेड़ा से वैध रवन्ना लेकर निवाई आ रहे थे। वहीं प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि इसी दौरान एक अन्य डंपर अधिकारियों को देखकर मौके से फरार हो गया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर और भी संदेह गहरा गया। मामले को लेकर कई सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि सामने आए वीडियो और खनिज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड में कथित रूप से स्पष्ट समानता दिखाई नहीं दी। आरोप यह भी है कि एक डंपर की नंबर प्लेट पर कालिख पुती हुई थी, जबकि उपलब्ध नंबर के आधार पर संबंधित रवन्ना सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो मौके पर खनिज विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त जांच के लिए क्यों नहीं बुलाया गया। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि वाहनों के दस्तावेज पूरी तरह सही थे तो नंबर प्लेट को ढका क्यों गया और यदि दस्तावेजों को लेकर जरा भी संदेह था तो बिना संयुक्त जांच के वाहन छोड़ने की जल्दबाजी आखिर किस आधार पर की गई। पूरे मामले में जब मीडिया ने वन रेंजर धारीलाल बैरवा से कैमरे पर जवाब जानना चाहा तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) टोंक अनुराग महर्षि ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। अब स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि यह भी स्पष्ट हो कि यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, लापरवाही या मिलीभगत हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जनता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच सच सामने लाएगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर ठंडे बस्ते की भेंट चढ़ जाएगा।

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