निवाई (लालचंद माली): सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में बंपुई वालों की धर्मशाला स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी संघ के सानिध्य में आयोजित श्री जिन सहस्रनाम महाअर्चना विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में सम्पन्न हुआ। विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ भगवान जिनेन्द्र की पूजा-अर्चना कर आत्मकल्याण की मंगल कामना की। जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा एवं विमल जौंला ने बताया कि विधानाचार्य सुधीर जैन के सानिध्य में सोधर्म इन्द्र रामपाल कासलीवाल, अशोक कुमार एवं मैना काला द्वारा अभिषेक एवं शांतिधारा कराई गई। इसके बाद रक्षीकरण, द्रव्य शुद्धि और जल शुद्धि की धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुई। मीडिया प्रभारी राकेश संघी ने बताया कि आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने वज्रपंजर रक्षा कवच के माध्यम से श्रद्धालुओं को मंत्रित किया। इन्द्र-इन्द्राणियों ने भक्तिभाव से नवदेवता एवं जिन सहस्रनाम का पूजन किया। माताजी के पावन सानिध्य में 1008 मंत्रों के उच्चारण, 11 शांतिधाराओं, 48 ऋद्धि मंत्रों के जाप एवं अर्घावली के साथ वातावरण भक्तिमय हो उठा। प्रतीक सेठी ने बताया कि मण्डल पर भगवान के 1008 नामों का उच्चारण करते हुए 1008 बादाम, 11 श्रीफल एवं 11 दीपक अर्पित कर श्रद्धालुओं ने पूजा एवं स्तुति की। कार्यक्रम में शिखरचंद काला, महावीर प्रसाद पराणा, विमल पाटनी, कमलेश मित्तल, मोहनलाल चंवरिया, राकेश संघी, प्रेमचंद सोगानी, प्रिंस छाबड़ा, पदमचंद पराणा, महेंद्र चंवरिया, राजेन्द्र सेदरिया, त्रिलोक हरभगतपुरा, महावीर खंडवा, अजीत काला, विमल सोगानी, विजय टोंग्या सहित बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने श्रीफल अर्पित कर पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम का मंगलाचरण अजीत काला ने किया। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने कहा कि "मनुष्य भगवान के पास भगवान का कल्याण करने नहीं, बल्कि अपने आत्मकल्याण के लिए आता है। आत्म स्वार्थी बनो, कषाय स्वार्थी मत बनो। आत्म स्वार्थी बनना ही कल्याण का मार्ग है।" उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति है, इसलिए मनुष्य को क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से दूर रहकर धर्ममार्ग अपनाना चाहिए। प्रवक्ताओं ने बताया कि मंगलवार को आर्यिका विज्ञाश्री माताजी का मंगल विहार सम्पन्न हुआ। बुधवार सुबह गुंसी स्थित विज्ञातीर्थ पर माताजी का गाजे-बाजे और जयघोष के साथ भव्य मंगल प्रवेश होगा, जिसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं में इस पावन अवसर को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है।
आत्म कल्याण का मार्ग आत्मस्वार्थ में, कषाय स्वार्थ में नहीं: आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
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July 14, 2026
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