तीन जैन संघों का ऐतिहासिक मंगल मिलन, धर्ममय वातावरण में गूंजे जयघोष; संतों ने दिया संयम, संस्कार और आत्मकल्याण का संदेश

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में सोमवार को चन्द्रप्रभु जैन मंदिर में तीन जैन संघों का भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल वात्सल्य मिलन समारोह श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि विलोक सागर महाराज, मुनि विबोध सागर महाराज ससंघ, परम् पूज्य आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि विश्वविजय सागर महाराज तथा भारत गौरव आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। चातुर्मास समिति के प्रवक्ता सुनील भाणजा एवं हितेश छाबड़ा ने बताया कि प्रातःकाल गाजे-बाजे, धर्मध्वजाओं और जयघोष के साथ तीनों संघों का मंगल मिलन हुआ। आर्यिका गणनी विज्ञाश्री माताजी ससंघ ने संतों की गुरु चरण वंदना की। समाजजनों ने चन्द्रप्रभु मंदिर में संतों की अगवानी कर पुष्पवर्षा एवं जयकारों के साथ अभिनंदन किया, जिससे पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। इसके पश्चात सभी संतों ने भगवान चन्द्रप्रभु के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मकल्याण है। धन, वैभव और भौतिक सुख क्षणभंगुर हैं, जबकि धर्म, संयम, क्षमा, सदाचार और आत्मचिंतन ही जीवन की वास्तविक पूंजी हैं। उन्होंने राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ का त्याग कर अहिंसा, सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। धर्मसभा में शिखरचंद काला, विष्णु बोहरा, महावीर पराणा, अजित काला, नवरत्न टोंग्या, त्रिलोक रजवास, मुकेश संघी, हेमराज नमक, महावीर मित्तल, सुनील भाणजा, हितेश छाबड़ा, अजय सोगानी, ज्ञानचंद सोगानी, मुकेश बनेठा, अशोक चंवरिया, मनोज पाटनी, नेमी खंणदेवत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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