निवाई (लालचंद माली): उप जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण करने पहुंची जिला औषधि भंडार गृह टोंक के प्रभारी अधिकारी डॉ.संगीत चौधरी की टीम को दवाओं का स्टॉक, रखरखाव और वितरण व्यवस्था तो संतोषजनक मिली, लेकिन अस्पताल की हकीकत एक बार फिर स्टाफ की भारी कमी के रूप में सामने आ गई। तीन दवा वितरण केंद्र (डीडीसी) होने के बावजूद पूरे अस्पताल में केवल दो फार्मासिस्ट रोजाना 900 से अधिक मरीजों को दवा वितरण करने का जिम्मा संभाल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर "बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं" का दावा कब तक महज दो कर्मचारियों के कंधों पर टिका रहेगा। निरीक्षण के दौरान डॉ.संगीत चौधरी के साथ फार्मासिस्ट मनीष यादव एवं सूचना सहायक महावीर प्रसाद महावर मौजूद रहे। टीम ने दवा वितरण केंद्र एवं सब-स्टोर का निरीक्षण किया, जहां दवाएं निर्धारित तापमान के अनुरूप श्रेणीवार व्यवस्थित मिलीं। मौसमी बीमारियों को देखते हुए एंटीबायोटिक्स, पेन किलर सहित आवश्यक दवाओं का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध पाया गया और किसी भी आवश्यक दवा की कमी नहीं मिली। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि सीमित स्टाफ के बावजूद मरीजों को दवा वितरण की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा रही है तथा कतार प्रबंधन भी संतोषजनक रहा। हालांकि, तीन डीडीसी का संचालन केवल दो फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस पर डॉ.संगीत चौधरी ने प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को उच्चाधिकारियों से समन्वय कर शीघ्र अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों को यह भी निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री नि:शुल्क निरोगी राजस्थान दवा योजना की एसओपी के अनुरूप प्रिस्क्रिप्शन पर दवाओं के नाम स्पष्ट एवं सुपाठ्य लिखे जाएं तथा ऑनलाइन स्टॉक प्रविष्टियां शत-प्रतिशत त्रुटि रहित रखी जाएं, ताकि दवा उपलब्धता में किसी प्रकार का व्यवधान न आए। निरीक्षण के बाद भले ही दवा व्यवस्था पर संतोष जताया गया हो, लेकिन अस्पताल में वर्षों से चली आ रही मानव संसाधन की कमी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि जब दो फार्मासिस्ट ही पूरे सिस्टम का सहारा बने हुए हैं, तो आखिर स्वास्थ्य व्यवस्था की असली "दवा" कब मिलेगी।
निरीक्षण में सब 'दुरुस्त', लेकिन दो फार्मासिस्टों के भरोसे 900 मरीज: सिस्टम की सेहत पर कौन करेगा इलाज
By -
July 08, 2026
0
Tags: