बीकानेर (मुकेश रामावत): शहरी परकोटे के रत्ताणी व्यासों के चौक में करंट लगने से युवक राहुल ओझा की दर्दनाक मौत के बाद बीकानेर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई लिमिटेड यानी BKESL की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर विभाग का 4 महीने पुराना एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें पहले ही लोहे के पोलों से जान-माल के खतरे की बात कही गई थी। वायरल पत्र 20 मार्च 2026 का है और इसे BKESL ने नयाशहर थानाधिकारी को लिखा था। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि पुष्करणा स्कूल के पास चाय की दुकान के सामने लगे लोहे के पोल से करंट आने के कारण एक गाय की मौत हो गई थी। पत्र में BKESL ने यह आश्वासन भी दिया था कि शहर में लगे सभी लोहे के पोलों का सर्वे करवाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदला जाएगा लेकिन 20 मार्च से 23 जुलाई तक 4 महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 23 जुलाई की सुबह रत्ताणी व्यासों के चौक में सड़क पर पड़े प्लास्टिक कोटेड तारों को हटाने के दौरान राहुल ओझा करंट की चपेट में आ गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि राहुल परिवार का इकलौता कमाने वाला था।
बार-बार हो रही इन घटनाओं से शहरवासियों में रोष है। लोगों का कहना है कि विभाग ने कागजों पर आश्वासन दिया, लेकिन हकीकत में खतरनाक पोल और जर्जर तार आज भी शहर में जानलेवा बने हुए हैं। इस मामले में पूर्व मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर घटना की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता व मुआवजा देने की मांग की है। उनके साथ कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब BKESL को 20 मार्च को ही खतरे की जानकारी थी, तो फिर शहर के लोहे के पोलों को बदलने के लिए 4 महीने में क्या कदम उठाए गए।