बीकानेर बना खजूर का नया हब: 350 हैक्टेयर में खेती, किसानों की आय दोगुनी, सरकार दे रही 75% तक अनुदान

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (मुकेश रामावत): रेगिस्तान की धरती पर अब खजूर लहलहा रही है। बीकानेर जिले में खजूर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन गई है। जिले में इस समय करीब 350 हैक्टेयर क्षेत्र में खजूर के बगीचे लगे हुए हैं और रुझान लगातार बढ़ रहा है।  

*अच्छी पैदावार और अच्छा भाव*  

उद्यान विभाग के अनुसार इस साल उत्पादन के साथ-साथ बाजार में भी खजूर को अच्छे दाम मिले हैं। किसानों को प्रति पौधा 80 से 100 किलो तक फल मिला और बाजार में 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक भाव रहा। इससे कई किसानों की आय लगभग दोगुनी हुई है।  

*प्रगतिशील किसान* 

शिवकरण कूकणा, जय भगवान, ओपी हर्ष, बृजमोहन चांडक और केसरी चंद ने बताया कि बीकानेर की खजूर की मांग अब दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब तक पहुंच रही है।  

*सरकार का साथ, 75% तक सब्सिडी* 

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत "पश्चिमी राजस्थान में खजूर क्षेत्रफल विस्तार" योजना के अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।  

*किसान खजूर बगीचा लगाने पर 75% तक अनुदान ले सकते हैं:*  
- टिश्यूकल्चर पौधा: 3000 रुपये प्रति पौधा या लागत का 75%  
- ऑफशूट पौधा: नया ऑफशूट 1000 रुपये का 75%, जड़ विकसित पौधा 1500 रुपये का 75%  
एक किसान को 0.5 से 4 हैक्टेयर तक पर अनुदान मिलेगा। बगीचे के लिए ड्रिप सिंचाई अनिवार्य है।  

*कहां से मिलेंगे पौधे*  

ऑफशूट पौधे सगरा भोजका फार्म जैसलमेर, खारा फार्म बीकानेर और कृषि विश्वविद्यालयों से मिलेंगे। टिश्यूकल्चर पौधे डीबीटी मान्यता प्राप्त लैब और अतुल राजस्थान डेटपाम, जोधपुर से उपलब्ध हैं। उपनिदेशक उद्यान प्रेमाराम ने बताया कि इच्छुक किसान जरूरी दस्तावेजों के साथ उपश्र निदेशक उद्यान कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। खजूर की किस्मों में बरही, मेडजूल, अजवा, खलास जैसी मादा और अल-इन-सिटी, घनामी जैसी नर किस्में शामिल हैं।

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