निवाई (लालचंद माली): मानसून की पहली बड़ी बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। कुरेडा गांव से निकलने वाली सहोदरा नदी में पानी आते ही कुरेडा, गहलोद, ज्वाली, पासरोटिया, डोडवाड़ी, मुंडिया और कुरेडी सहित सात ग्राम पंचायतों का उपखंड मुख्यालय से सीधा संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया। वर्ष 2024 में टूटा पुल आज तक दोबारा नहीं बन पाया, जिससे ग्रामीणों को हर बरसात में वही पुरानी परेशानी झेलनी पड़ रही है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक वैकल्पिक रास्ता तैयार कर आवागमन शुरू किया था, लेकिन नदी में पानी आते ही वह रास्ता भी बंद हो गया। नतीजतन हजारों लोगों के सामने आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है। अब उपखंड मुख्यालय पहुंचने के लिए लोगों को पासरोटिया मार्ग से करीब 30 किलोमीटर और टोंक मार्ग से लगभग 40 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और सरकारी कामकाज से आने-जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय और धन दोनों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
गहलोद भाजपा मंडल अध्यक्ष लोकेश कुरेडा ने बताया कि सहोदरा नदी में पानी आने से सात पंचायतों का संपर्क प्रभावित हो गया है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक मार्ग चालू कराने और टूटे पुल का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में यही संकट सामने आता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर सात पंचायतों की तकदीर कब तक एक टूटे हुए पुल के भरोसे लटकी रहेगी।