बीकानेर (मुकेश रामावत): सूखे और कम पानी वाले क्षेत्र में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए काजरी ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। सोमवार 06 जुलाई को काजरी परिसर में "सहजन आधारित कृषि प्रणाली" पर 3 दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया। इस नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना का उद्घाटन SKAU के अनुसंधान निदेशक डॉ.एन.के. शर्मा ने किया। डॉ.एन.के. शर्मा ने कहा कि सहजन का हर हिस्सा काम आता है। इसके बीज, पत्ते, जड़, तना, छाल और लकड़ी से खाद्य, दवा, पशुआहार, जल शोधन और उद्योग तक लाभ लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मोरिंगा पशुओं के दूध-मांस उत्पादन को बढ़ाता है और मिट्टी की उर्वरकता भी सुधारता है। पोषण और आर्थिक सुरक्षा दोनों के लिए यह फसल वरदान साबित होगी। परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ.बीरबल ने बताया कि बीकानेर जिले की अलग-अलग तहसीलों से 25 किसान इस बैच में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हर किसान को प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाण पत्र के साथ 1000 मोरिंगा के पौधे मुफ्त दिए जाएंगे। अब तक इस परियोजना के तहत जिले के 500 से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। कई किसान मोरिंगा पाउडर बनाकर उसकी मार्केटिंग भी शुरू कर चुके हैं। काजरी अध्यक्ष डॉ.नवरतन पंवार ने कहा कि मोरिंगा बहुउद्देशीय और अत्यधिक पौष्टिक पौधा है। इसमें बायोमास उत्पादन की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इस योजना से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करें।
कार्यक्रम में डॉ.मनोज गोरा और डॉ. सीताराम जाट का भी सहयोग रहा।