जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): प्रदेश के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर के अंतर्गत आने वाले मानसरोवर स्थित थड़ी मार्केट (सेक्टर-115) के निवासी इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर पिछले लगभग 20 दिनों से पेयजल की आपूर्ति बेहद कम दबाव से हो रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में सीवर लाइनें लगातार जाम रहने से लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलदाय विभाग की ओर से नियमित जलापूर्ति तो की जा रही है, लेकिन पानी का दबाव इतना कम है कि अधिकांश घरों में पहली मंजिल तक भी पानी नहीं पहुंच पा रहा। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निवासियों का आरोप है कि पूरे मानसरोवर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बूस्टर पंपों के इस्तेमाल के कारण सामान्य उपभोक्ताओं के हिस्से का पानी खींच लिया जाता है, जिससे बाकी घरों में पानी की सप्लाई कमजोर हो जाती है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पूर्व में जब ऐसी ही समस्या सामने आई थी, तब तत्कालीन पार्षद नत्थूराम गुनवानी के प्रयासों से सुबह 5 से 7 बजे तक अस्थायी बिजली कटौती करवाई गई थी। उस दौरान बूस्टर पंप बंद रहने से पानी पर्याप्त दबाव के साथ घरों तक पहुंचा था। लोगों का कहना है कि इस बार समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इधर, थड़ी मार्केट क्षेत्र की सीवर व्यवस्था भी बदहाल बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग रोजाना किसी न किसी स्थान पर सीवर जाम होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे दुर्गंध, गंदगी और संक्रमण का खतरा बना रहता है। व्यापारियों और राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। निवासियों का कहना है कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही पेयजल और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की यह स्थिति है, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। लोगों ने जलदाय विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि बूस्टर पंपों के अनियंत्रित उपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जाए, जलापूर्ति का दबाव बढ़ाया जाए तथा सीवर लाइन की नियमित सफाई और मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक रूप से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराने को विवश होंगे।