बीकानेर (मुकेश रामावत): निजी स्कूलों पर मासिक निरीक्षण के नए आदेश को लेकर राजस्थान के निजी शिक्षण संस्थानों में आक्रोश है। स्कूल एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन "सेवा" ने सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए आंदोलन का ऐलान किया है।
*बैठक में लिया गया बड़ा फैसला*
सेवा राजस्थान की बीकानेर देहात कमेटी की बैठक धोबीधोरा स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष कृपालदान चारण की अध्यक्षता में हुई। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि 20 जुलाई को प्रदेश के सभी निजी स्कूल स्वेच्छा से बंद रहेंगे। इसी दिन संचालक शिक्षा निदेशालय पर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर के स्कूल संचालक शामिल होंगे।
*विरोध का कारण बना "राज शाला संबलन" एप*
एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी शैलेष भदानी ने बताया कि 2 जुलाई को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आदेश जारी कर "राज शाला संबलन" मोबाइल एप के जरिए गैर-सरकारी स्कूलों का अनिवार्य मासिक निरीक्षण शुरू करने के निर्देश दिए थे।
इसी आदेश के विरोध में सेवा ने मोर्चा खोल दिया है।
*इंस्पेक्टर राज से बढ़ेगा भ्रष्टाचार*
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कोडाराम भादू ने कहा कि इस आदेश से प्रदेश में "इंस्पेक्टर राज" कायम होगा। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और निजी विद्यालय संचालक मानसिक दबाव में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम 2009 और राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम 1989 के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों को स्वायत्तता प्राप्त है। सरकार का यह आदेश उस स्वायत्तता पर सीधा आघात है।
"सरकारी और निजी स्कूलों के संसाधन, व्यवस्थाएं और कार्यप्रणाली अलग-अलग हैं। ऐसे में दोनों का मूल्यांकन एक ही पैमाने से करना न्यायसंगत नहीं है"।
*कोडाराम भादू*
*आगे की रणनीति*
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि वह इस आदेश को तुरंत वापस ले। अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 20 जुलाई के बंद और प्रदर्शन के लिए प्रदेशभर के निजी स्कूल संचालकों से सहयोग की अपील की गई है।