कोटपूतली (ईशाक खान): देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले क्रांतिकारी अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 120वीं जयंती गुरूवार को ग्राम सांगटेड़ा में अत्यंत गरिमापूर्ण और श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत स्वतंत्रता संग्राम के इस महानायक की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई, जिसके बाद सभी ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया। विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए गगनभेदी देशभक्ति के नारों से पूरा विद्यालय परिसर और आसपास का क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। युवाओं और बच्चों का जोश देखते ही बन रहा था। समाजसेवी रतन लाल शर्मा ने पं.चंद्रशेखर आजाद के प्रेरक जीवन और उनके संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के महान क्रांतिकारियों ने अपनी जवानी, ऐशो-आराम और सर्वस्व मातृभूमि की रक्षा में होम कर दिया। आजाद का जीवन हर पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम की सबसे बड़ी प्रेरणा है। इस दौरान आजाद की उस ऐतिहासिक और महान प्रतिज्ञा को याद किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जीते जी अंग्रेज सरकार उन्हें कभी हाथ नहीं लगा पायेगी। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक इस प्रतिज्ञा को निभाया। वक्ताओं ने उनके उस अटूट विष्वास को भी रेखांकित किया। जिसमें वे कहते थे कि अंग्रेजों के पास ऐसी कोई गोली ही नहीं बनी जो उनके शरीर को छू सके। इस दौरान बाबूलाल, प्रताप सिंह, रामानंद व शुभम समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्रायें व ग्रामीण मौजूद रहें।
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