बीकानेर: ‘निगाहों के समंदर में’ में मन के अहसासों की बारीक बुनावट और अनुभवों की गहराई है। संग्रह में ग़म और ख़ुशी, मिलना-बिछड़ना, शिकवा-शिकायत, तन्हाई और महफिल, वफ़ा और धोखा, सहरा, जंगल और शहर सहित ज़िंदगी के तमाम रंग और ख़ुश्बू मौजूद हैं। मुक्ति संस्था की ओर से गुरुवार को सूचना केन्द्र सभागार में डाॅ.हरि शंकर आचार्य के मुक्तक संग्रह ‘निगाहों के समंदर में’ के विमोचन के दौरान वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि यह मुक्तक, लोक परम्पराओं से प्रेरित हैं, जो कि आधुनिक संवेदनाओं को स्पर्श करते हैं। इनके माध्यम से जीवन के विविध रंग उभरकर सामने आए हैं। मुक्तक बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक परम्परा के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि यह कृति भावनाओं के गहरे समन्दर को प्रभावी तरीके से निगाहों से उकेरती है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए गीतकार मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि डाॅ.आचार्य का यह संग्रह साधारण में असाधारण है। भाषा की प्रवाहमयता इसके प्राण हैं। इनमें कृत्रिमता नहीं है और कोई जबरदस्ती का अलंकार भी नहीं है। प्रत्येक मुक्तक के सरल, आत्मीय शब्द लेखक के दिल से निकलकर पाठक के दिल में समाते हैं।
अध्यक्षता करते हुए डाॅ.ओमप्रकाश सारस्वत ने कहा कि डाॅ.आचार्य ने प्रत्येक मुक्तक को परिपक्वता से रखा है। इनमें विषयों की वैविध्यता है। यह हमें विभिन्न रसों का आस्वादन करवाती है। उन्होंने कहा कि मंचीय प्रकृति के यह मुक्तक लम्बी उड़ान भरेंगे, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए इरशाद अज़ीज़ ने कहा कि गीत या कतआ कहना उतना आसान नहीं होता, जितना अक्सर समझ लिया जाता है। डाॅ.आचार्य ने मंचीय गीत परम्परा और उसकी शैली को कामयाब रखते हुए अपने जज़्बात और अपने समय की सच्चाइयों को शिद्दत से लिखा है। इस नाते इन्हें बेहद जिम्मेदार कवि माना जा सकता है। डाॅ.आचार्य ने अपनी सृजन यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह उनकी पांचवीं कृति है। अब तक राजस्थानी और हिंदी काव्य की दो-दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने पुस्तक के चुनिंदा मुक्तक प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि कला और साहित्य बीकानेर के कण-कण में है। यह रगों में लहू की तरह मन और मस्तिष्क में प्रवाहमान हैं। इस दौरान पुस्तक मंदिर प्रकाशन के विकास पारीक, चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित, शायर इरशाद अज़ीज़ तथा श्याम सुंदर व्यास का पुस्तक सृजन यात्रा में सहयोग के लिए सम्मान किया गया। राजाराम स्वर्णकार में स्वागत उद्बोदन दिया तथा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जुगल किशोर व्यास ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन गोपाल जोशी ने किया। इस दौरान दुर्गा शंकर आचार्य, डॉ.अजय जोशी, जनसंपर्क अधिकारी सुरेश बिश्नोई, राजेंद्र भार्गव, जितेंद्र व्यास, मधु सूदन व्यास, डॉ.दिनेश चंद्र, डॉ.सुभाष जोशी, अशोक रंगा सहित अनेक लोग मौजूद रहे।