नापासर/बीकानेर (मुकेश रामावत): नापासर दहेज प्रताड़ना के एक मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए युवक का मोबाइल जब्त करने पर नापासर पुलिस विवादों में घिर गई है। श्रीडूंगरगढ़ निवासी विकास पुरोहित ने नापासर थानाधिकारी के खिलाफ न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर कर आरोप लगाया है कि पुलिस ने नियमों की पालना किए बिना उसका मोबाइल रख लिया और 15 दिन से नहीं लौटाया।। विकास पुरोहित पर नापासर थाने में दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज है। 15 जून को नोटिस पर वह थाने में पेश हुआ। विकास का आरोप है कि पूछताछ के दौरान थानाधिकारी ने उसका मोबाइल मांगा। निजी डेटा का हवाला देकर उसने मना किया, लेकिन जांच के नाम पर मोबाइल ले लिया गया और कहा गया कि 'कल लौटा देंगे'।
आरोप है कि बार-बार मांगने पर भी मोबाइल नहीं लौटाया गया। आखिरकार 22 जून को विकास ने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट ने मामले में संज्ञान ले लिया है। विकास का कहना है कि मोबाइल नहीं होने से उसका व्यापार ठप हो गया है, क्योंकि आज व्यापार का बड़ा हिस्सा मोबाइल पर ही निर्भर है। नापासर थानाधिकारी सुषमा शेखावत का कहना है कि पति-पत्नी दोनों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। पत्नी ने विकास के मोबाइल में कुछ गलत होने का आरोप लगाया, जिसके बाद जांच के लिए मोबाइल लिया गया। एसएचओ का दावा है कि विकास खुद ही मोबाइल वापस लेने नहीं आया, जबकि उसे बार-बार लेने के लिए कहा जा चुका है। एडवोकेट अनिल सोनी के अनुसार पुलिस को जांच के लिए मोबाइल जब्त करने का अधिकार है, लेकिन इसकी पूरी कानूनी प्रक्रिया है। दो गवाहों के सामने जब्ती मेमो बनाना, डिजिटल हैश वैल्यू रिकॉर्ड करना और 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है। अगर जब्त नहीं भी करना हो तो 24 घंटे से ज्यादा मोबाइल नहीं रखा जा सकता। दहेज प्रताड़ना के इस मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। विकास ने मोबाइल प्रकरण को लेकर एक वीडियो भी जारी किया है। फिलहाल मामले की सच्चाई जांच का विषय है। अब देखना यह है कि कोर्ट में आरोप सत्य साबित होते हैं या कोई नया सच सामने आता है।