बीकानेर में कांग्रेस का 'पीबीएम बचाओ' आंदोलन: डोटासरा-जूली की अगुवाई में कलेक्ट्रेट का घेराव, बोले— 'सरकार की नींद उड़ाकर रहेंगे

AYUSH ANTIMA
By -
0



बीकानेर (मुकेश रामावत): पीबीएम अस्पताल की जर्जर व्यवस्था और सीमावर्ती इलाकों में धार्मिक स्थलों पर चली बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को कांग्रेस ने बीकानेर में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अगुवाई में हजारों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। कांग्रेस ने इस आंदोलन को 'पीबीएम सुधारो जनआंदोलन' का नाम दिया है।

*डोटासरा का हमला — 'मरीज तड़प रहे, सरकार सो रही'*  

जनसभा में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, "पीबीएम राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन हालत ये है कि मरीज दवा-इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। प्रसूताओं की मौत के पीछे अस्पताल की बदइंतजामी और स्टाफ की लापरवाही साफ दिखती है। यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं, बीकानेर की जनता के स्वास्थ्य और हक की लड़ाई है।" डोटासरा ने बॉर्डर क्षेत्र में धार्मिक स्थलों को तोड़ने की कार्रवाई को 'जनविरोधी' बताया और चेतावनी दी कि जब तक पीबीएम की व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं और बुलडोजर कार्रवाई नहीं रुकती, कांग्रेस का संघर्ष सड़कों पर जारी रहेगा।

*जूली की हुंकार — 'जनता के साथ अन्याय हुआ तो ईंट से ईंट बजा देंगे'*  

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, "प्रदेश के दो बड़े नेताओं का बीकानेर आना बताता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है। भाजपा सरकार की नीतियों ने आम आदमी का जीना मुहाल कर दिया है।" जूली ने दावा किया कि 30 जून का कलेक्ट्रेट घेराव ऐतिहासिक रहा और इसमें बीकानेर के जागरूक नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, "कार्यकर्ता तय लक्ष्य से ज्यादा संख्या में पहुंचे हैं। अगर जनता के साथ अन्याय बंद नहीं हुआ तो हम सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे।"

*ग्राउंड पर तैयारी: हर वार्ड से 150 कार्यकर्ता*  

शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने बताया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए हर वार्ड से न्यूनतम 150 कार्यकर्ताओं को लाने का टारगेट दिया गया था। ब्लॉक, मंडल और वार्ड स्तर तक जिम्मेदारी बांटी गई। सामाजिक संगठनों को भी आंदोलन से जोड़ा गया।

*कांग्रेस के 3 बड़े आरोप*  
1. पीबीएम अस्पताल में लापरवाही: दवाइयों की भारी कमी, डॉक्टर-स्टाफ की मनमानी, प्रसूताओं की लगातार मौतें। 
2. धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई: सीमावर्ती क्षेत्र में मस्जिदों-धार्मिक स्थलों को प्रशासन द्वारा तोड़ा जाना।  
3. सरकार की अनदेखी: जनहित के मुद्दों पर भाजपा सरकार की चुप्पी और जनविरोधी फैसले।  
प्रदर्शन के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट पर रहा। कलेक्ट्रेट परिसर के चारों तरफ भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कांग्रेस ने दावा किया कि इस जनआंदोलन में पूर्व मंत्री डॉ.बी.डी. कल्ला, भंवर सिंह भाटी, विधायक सुशीला रामेश्वर डूडी, देहात जिलाध्यक्ष बिशनाराम सियाग समेत जिले के सभी बड़े नेता और हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!