पावटा: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पावटा तहसील के ग्राम भांकरी निवासी प्रसिद्ध ज्योतिषी पं. गौरीशंकर शर्मा पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की मिसाल बने हुए हैं। उनका मानना है कि "पर्यावरण बचेगा तभी हम बचेंगे"। पं.शर्मा प्रत्येक वर्ष 5 जून से बरसात के अंत तक हजारों पेड़ लगाते हैं। उनके आवास पर निःशुल्क हस्तरेखा दिखाने आने वाले लोगों को भी वे वृक्षारोपण और पर्यावरण रक्षा का संकल्प दिलाते हैं। पं.शर्मा के छोटे भाई गोविंद भारद्वाज पशुधन निरीक्षक हैं। बड़े भाई से प्रेरणा लेकर उन्होंने सेवाकाल में 31,416 गाय, 3,650 नीलगाय, 3,170 मोर, 401 बंदर, 398 लंगूर, 3 जरख, 3 हिरण, 1 उल्लू, 6 गीदड़, 3 लोमड़ी और 800 से अधिक छोटे परिंदों का उपचार किया। डॉ.गौरीशंकर, मोहित और दिव्या के साथ मिलकर उन्होंने दुर्लभ प्रजाति के 27 बाज पक्षियों का भी उपचार किया। भारद्वाज ने 420 ऐसे पशुओं के बच्चों को निप्पल-बोतल से दूध पिलाकर पाला, जिनकी मां मर गई थी या जंगल में छोड़कर चली गई थी। इनमें नीलगाय, गाय, बंदर और लंगूर के बच्चे शामिल हैं। घास खाने लायक होने पर उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाता है। इन बच्चों को रोज सुबह-शाम बोतल से दूध पिलाते हैं। भारद्वाज बताते हैं कि मां के बचपन में स्वर्गवास हो गया था, इसलिए बिना मां के वन्यजीव बच्चों की सेवा कर जीवन सार्थक बना रहा हूं। राष्ट्रीय राजमार्ग-248 पर हादसे में घायल 7,545 गोवंश के टूटे पैरों का प्लास्टर कर उन्हें चलने योग्य बनाया। कुएं में गिरे 31 पशु-पक्षियों को जान जोखिम में डालकर निकाला। कोरोना काल और लंपी स्किन बीमारी के दौरान 1,500 से अधिक गायों की जान बचाई। चर्म रोग से पीड़ित 188 लंगूरों का लगातार उपचार कर उन्हें स्वस्थ किया।मोहित और दिव्या हर गर्मी में पक्षियों के लिए परिंडे बांधते हैं और बरसात में वृक्षारोपण करते हैं। पं.शर्मा के पिता वैद्य हनुमान प्रसाद मिश्रा भी निःशुल्क आयुर्वेदिक उपचार करते थे। उन्हीं की प्रेरणा से आज पूरा परिवार वन्यजीव सेवा में जुटा है।
3/related/default