बीकानेर: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, बीकानेर के तहत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कार्यालय की कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सूचना का अधिकार के तहत सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने यह अंदेशा पैदा कर दिया है कि कर्मचारी के स्थायी नौकरी के दावों को दबाने के लिए कार्यालय से महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज़ और आवक-जावक रिकॉर्ड ही गायब कर दिए गए हैं या फिर जानबूझकर छुपाए जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांचू में कार्यरत सहायक लैब टेक्नीशियन किशन गोपाल छंगाणी ने 2 अप्रेल 2026 को अपने अनुभव प्रमाण-पत्र में संशोधन और बिना किसी सर्विस ब्रेक के लगातार सेवा में होने का एक प्रार्थना-पत्र सीएमएचओ कार्यालय में पेश किया था। प्रार्थी के पास इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह आवेदन विभाग के राजकीय रिकॉर्ड में आरआर नंबर 2461 6 अप्रेल 2026 पर बकायदा दर्ज किया गया था।
*आरटीआई के जवाब ने खोली पोल: "रिकॉर्ड में दस्तावेज़ ही नहीं!"*
हैरानी की बात तब सामने आई जब प्रार्थी ने 16 अप्रेल 2026 को ऑनलाइन आरटीआई दाखिल कर इसी आरआर नंबर 2461 वाले पत्र पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी तो 9 अप्रेल को लोक सूचना अधिकारी, सीएमएचओ बीकानेर द्वारा दिए गए आधिकारिक जवाब में गैर- जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए साफ लिख दिया गया कि उक्त दस्तावेज़ रिकॉर्ड में पाया ही नहीं गया।जब प्रार्थी के पास सरकारी सील और हस्तलिखित आरआर नंबर 2461 की पावती मौजूद है, तो वह मूल फाइल और आवेदन अचानक सीएमएचओ कार्यालय के रिकॉर्ड से 68 दिनों में कैसे "गायब" हो गया।
*स्थायी नौकरी के दस्तावेज़ों को नष्ट करने की साजिश का अंदेशा*
प्रार्थी ने अपने हर प्रार्थना-पत्र में यह पुरजोर दावा किया है कि वह राजस्थान सरकार का बिना किसी एग्रीमेंट और बिना किसी सर्विस ब्रेक का स्थायी कर्मचारी है। ऐसे में आरटीआई के तहत रिकॉर्ड "न मिलने" का बहाना बनाना इस बात की ओर सीधा इशारा करता है कि विभाग के भीतर बैठे कुछ रसूखदार बाबू या अधिकारी प्रार्थी के स्थायीकरण और सेवा रिकॉर्ड को खुर्द-बुर्द करने की गहरी साजि़श रच रहे हैं।
*अभिलेख संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन,एफआईआर की मांग*
राजस्थान सार्वजनिक अभिलेख अधिनियम और स्थापित प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, यदि किसी सरकारी कार्यालय से कोई दर्ज शुदा दस्तावेज़ या फाइल गायब होती है, तो संबंधित बाबू और अधिकारी के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई और पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर लापरवाही या सोची-समझी साजिश पर संयुक्त निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, बीकानेर जोन) और शासन सचिव (जयपुर) क्या संज्ञान लेते हैं। क्या रिकॉर्ड गायब करने वाले दोषियों को चार्जशीट थमाई जाएगी या फिर पीडित कर्मचारी को अपने ही हक के दस्तावेज़ों के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।