सांगानेर विवाद का सच: रातों-रात अवैध कॉम्प्लेक्स खड़ा कर आम गली दबाने के खेल को छुपाने के लिए उपायुक्त पर मढ़े झूठे आरोप

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): सांगानेर में चल रहे इस पूरे विवाद का सच अब पूरी तरह खुलकर सामने आ गया है। जिस मामले में उपायुक्त डॉ.रवि गोयल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अनशन का ड्रामा रचा जा रहा है, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। दरअसल, यह पूरा मामला भू-माफिया शैली में रातों-रात एक बड़ा अवैध कॉम्प्लेक्स खड़ा करने और सार्वजनिक गली (आम रास्ते) को दबाने के खेल से जुड़ा है। मौका-मुआयने और तथ्यों के अनुसार, यहाँ बिना किसी वैध पट्टे और बिना स्वीकृत नक्शे के पूरा कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया और आम गली को कवर करने की नीयत से वहाँ तीन नए पिलर भी खड़े कर दिए गए। इस मनमानी और रास्ता रोकने के खिलाफ सबसे पहले स्थानीय लोगों के द्वारा ही नगर निगम में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए इस अवैध निर्माण को सीज किया था लेकिन कानून को ठेंगा दिखाते हुए नगर निगम द्वारा लगाई गई सरकारी सील को तोड़कर रात के अंधेरे में दोबारा निर्माण चालू कर दिया गया, जिसकी शिकायत भी निगम में दर्ज है। जब इस सील तोड़ने और अवैध पिलरों पर प्रशासन ने दोबारा शिकंजा कसा और सोशल मीडिया पर उपायुक्त को मां-बहन की भद्दी गालियां देने का ऑडियो वायरल होने के बाद जब आरोपी खुद कानून के शिकंजे में पूरी तरह घिर गया, तो उसने इस अवैध कॉम्प्लेक्स, सील तोड़ने की करतूत और गली दबाने के कारनामे से ध्यान भटकाने के लिए उपायुक्त पर झूठे आरोप मढ़कर अनशन का 'विक्टिम कार्ड' खेल दिया। आज सबसे बड़ा प्रशासनिक और कानूनी सवाल यही है कि सार्वजनिक गली को दबाने वाले इन तीन पिलरों और इस अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि दबाव की इस ब्लैकमेलिंग राजनीति के आगे कानून और जनहित से समझौता नहीं किया जा सकता।

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