नारायणपुर: हौसले और परिश्रम के आगे साधनों की कमी भी बौनी पड़ जाती है। नारायणपुर क्षेत्र के गांव के होनहार युवा मोहित सैन ने अपनी लगन से यह सिद्ध कर दिखाया। दिल्ली विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी बॉम्बे में तकनीकी स्नातकोत्तर एवं उच्च स्तरीय शोध के लिए चयन पाकर मोहित ने न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम उज्ज्वल कर दिया। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद मोहित ने अपने स्वप्न को साकार किया। पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सभी को आश्चर्यचकित किया और अब देश की सर्वोच्च संस्था आईआईटी बॉम्बे में शोध का निमंत्रण पाकर इतिहास रच दिया। आईआईटी बॉम्बे में तकनीकी स्नातकोत्तर के साथ उच्च स्तरीय अनुसंधान का चयन देश की सबसे कठिन उपलब्धियों में से एक माना जाता है। मोहित के चयन का समाचार मिलते ही पूरे उपखंड क्षेत्र में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई। परिजनों ने मिठाइयां बांटीं, ग्रामीणों ने बधाइयों की बौछार कर दी। बुजुर्गों की आंखें भर आई और उन्होंने कहा कि मोहित की इस सफलता से पूरे क्षेत्र के युवाओं को नई प्रेरणा मिलेगी। हर जुबान पर एक ही नाम था - "नारायणपुर का लाल"। मोहित की यह सफलता उनके अटूट संकल्प और निरंतर परिश्रम का परिणाम है। सीमित सुविधाओं के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी। अध्ययन के साथ-साथ स्वयं को निखारते रहे और आज देश की सर्वोच्च प्रयोगशाला में पहुंच गए। उनकी यह यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सोचता है कि गांव में रहकर बड़े लक्ष्य प्राप्त नहीं किए जा सकते। आईटी बॉम्बे में चयन पर मोहित ने कहा, "मैं अपने माता-पिता, गुरुओं और गांव के लोगों का आभारी हूं। मेरा लक्ष्य अब भारत के लिए विज्ञान और शोध के क्षेत्र में कुछ नया करना है, ताकि देश का नाम विश्व में और ऊंचा हो सके।"
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