गौशाला बनेंगी आत्मनिर्भर: श्री गोपाल गौशाला झुंझुनू ने अपनाई आधुनिक तकनीक, पटियाला से खरीदी अत्याधुनिक मशीनें

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गौ-सेवा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राजस्थान की प्रसिद्ध श्री गोपाल गौशाला, झुंझुनू ने तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर हाथ बढ़ाया है। गौशाला प्रबंधन ने पंजाब के पटियाला से तीन अत्याधुनिक मशीनों की खरीद की है, जो गौशाला के अपशिष्ट प्रबंधन और आर्थिक संसाधनों को नया आयाम देंगी। इस महत्वपूर्ण तकनीकी विस्तार के लिए श्री गोपाल गौशाला के अध्यक्ष प्रमोद खण्डेलिया, मंत्री प्रदीप पाटोदिया, पूर्व मंत्री नेमी अग्रवाल और डॉ.डीएन तुलस्यान ने विशेष रूप से पटियाला में मशीनों की कार्यप्रणाली समझी और गौशाला के गोबर गैस प्लांट के कुशल संचालन के लिए आवश्यक उपकरणों का चयन किया। खरीदी गई मशीनें विशेष रूप से गौशाला के गोबर गैस प्लांट से जुड़ी हुई हैं, जो कचरे को कंचन में बदलने का काम करेंगी। गोबर लकड़ी मेकिंग मशीन जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हुए यह मशीन गोबर से 'गोबर की लकड़ी' तैयार करेगी। इसका उपयोग अंतिम संस्कार, फैक्ट्रियों और खाना पकाने में ईंधन के रूप में किया जाएगा, जिससे पेड़ों की कटाई कम होगी। गोशाला में बने हॉस्पिटल के समीप संजय जालान सूरत की ओर से बन रहे बीमार गायो के लिए शेड मे पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए गौशाला ने 'डाउनर सिंड्रोम' से पीड़ित गायों के लिए यह लिफ्टिंग मशीन ली है, ताकि बीमार गायों को खड़ा कर उनका उपचार आसानी से किया जा सके। गौशाला के पदाधिकारियों ने बताया कि इन मशीनों के उपयोग से गौशाला की आय में वृद्धि होगी। गोबर से बनी लकड़ी और वर्मीकम्पोस्ट खाद को बाजार में बेचकर गौशाला आर्थिक रूप से मजबूत होगी। गोबर गैस प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, जिससे एलपीजी पर निर्भरता कम होगी। आधुनिक उपकरणों से बीमार पशुओं की देखभाल और साफ-सफाई में आसानी होगी।

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