झुंझुनू/अजमेर (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा सत्र 2026-27 से लागू किए जा रहे व्यापक पाठ्यक्रम सुधारों ने शिक्षा जगत में नई दिशा तय कर दी है। NCF 2023 और NEP 2020 के अनुरूप इन बदलावों का उद्देश्य रटने की प्रणाली से आगे बढ़कर कौशल, समझ और वास्तविक जीवन आधारित सीख को बढ़ावा देना है। कक्षा 9 से 12 तक के नए पाठ्यक्रम दस्तावेज 1 एवं 2 अप्रैल 2026 को जारी किए गए। कक्षा 9-10 में संरचनात्मक बदलाव करने के साथ ही तीन भाषा फार्मूला अनिवार्य, दो भारतीय भाषाओं पर विशेष बल, अंग्रेजी अब विदेशी भाषा के रूप में वर्गीकृत
मैथ्स व साइंस में दो स्तर (स्टैंडर्ड/एडवांस) की नई व्यवस्था व AI व कम्प्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषय अनिवार्य
वोकेशनल, आर्ट एवं फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया। परीक्षा प्रणाली में बड़ा परिवर्तन किया गया है, जिसमें कक्षा 10 में दो बार बोर्ड परीक्षा (बेहतर अंक का चयन) व ओपन बुक असेसमेंट (OBA) की शुरुआत, 50% प्रश्न एप्लिकेशन व केस स्टडी आधारित। सीबीएसई के सीनियर मास्टर ट्रेनर एवं प्रसिद्ध शिक्षाविद बिरला स्कूल, पिलानी के राजन शर्मा ने बताया कि इन बदलावों की वास्तविक सफलता उनके सटीक और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। उन्होंने बताया कि वे लगातार शिक्षकों के प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के ओरिएंटेशन के माध्यम से इस परिवर्तन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इसी दिशा में हाल ही में सीबीएसई अजमेर के क्षेत्रीय अधिकारी (RO) श्याम कपूर के साथ राजन शर्मा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। जिसमें शिक्षकों के व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्कूलों में नई प्रणाली के चरणबद्ध क्रियान्वयन, विद्यार्थियों व अभिभावकों के लिए जागरूकता पहल पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
*जमीनी स्तर पर बदलाव की तैयारी*
सीबीएसई ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष पीटीएम आयोजित कर अभिभावकों को नए पैटर्न से अवगत कराएं। साथ ही शिक्षकों को नई पद्धति के अनुरूप तैयार करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। सीबीएसई के ये परिवर्तन केवल पाठ्यक्रम बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा की सोच में बदलाव हैं।