पत्रकारिता की यह कोशिश होनी चाहिए कि जनभावनाओं की गूंज सत्ता के गलियारों तक पहुंचे। पत्रकारिता आमजन व सरकार के बीच सेतु का काम करती है। यह वह आईना है, जो सरकार की जन विरोधी नीतियों का विरोध करें व जन कल्याणकारी योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने का काम करें। पत्रकारिता वह नहीं कि सरकार कदमताल करें तो उसे मार्च पास्ट कहकर महिमा मंडित किया जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बात होती है तो यह खबर तुरंत सुर्खियां बन जाती है। मिडिया चैनल इस खबर को इस तरह परोसते हैं, जैसे उनको कान्फ्रेंस में लेकर बातचीत हुई है। भारतीय इलैक्ट्रिक मिडिया इस खबर को इस तरह प्रसारित करते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रगाढ़ मित्र हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसको लेकर बताते हैं कि उनकी ट्रंप से 40 मिनट तक बातचीत हुई है। बातचीत में यह दावा किया जाता है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव, होमरुज बंद होने का असर व आपसी साझेदारी को लेकर गंभीर चर्चा हुई। मिडिया अक्सर विपक्षी दलों की देशभक्ति की परीक्षा लेती नजर आती है लेकिन एक ज्वलंत प्रश्न है कि आखिर देश बड़ा है या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बड़े हैं। यह मैं नहीं कह रहा उपरोक्त तथ्य ट्रम्प के बयानों से साबित होते हैं। एक तरफ ट्रम्प दावा करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं तो दूसरी तरफ भारत को नरक बताकर 140 करोड देशवासियों का अपमान करते हैं। ट्रम्प ने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता की वजह से अप्रवासी अमेरिका में पैर जमाते हैं। इसके अनुसार यहां एक बच्चे का जन्म होते ही वह तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को भारत जैसे नरक देश से यहां बुला लेते हैं। राष्ट्रपति अपने बयानो से बार बार भारत का अपमान करते नजर आते हैं लेकिन इलैक्ट्रिक मिडिया ऐसे बयानों पर चुप्पी साध लेता है क्योंकि मिडिया को अपने आका को ही महिमान्वित करना है। बार बार ट्रम्प देश की संप्रभुता पर अपने बयानो से चोट करते हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री उस पर अपनी प्रतिक्रिया देना ही उचित नहीं समझते। प्रतिक्रिया न देना भारत की कायरता का प्रतीक है। जब मोदी को सबसे अच्छा दोस्त बताया जाता है तो अमेरिका का गुणगान होता है और भारत विरोधी बयानो को लेकर यह कहा जाता है कि ट्रम्प के बयानों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। उपरोक्त तथ्यों को देखें तो भारतीय इलैक्ट्रिक मिडिया का दोहरा चरित्र उजागर होता है कि ट्रम्प के बेहुदे बयानो पर कोई राष्ट्रीय डिबेट नहीं होती है जबकि फोन वाली बात राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है।
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