वसुंधरा राजे के बयान को लेकर मदन राठौड़ का पलटवार

AYUSH ANTIMA
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वसुंधरा राजे की सक्रियता प्रदेश नेतृत्व को चुनौती देती नजर आ रही है। उनके एक ताजा बयान को लेकर प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि यह जरुरी नहीं कि उनको बार बार मुख्यमंत्री बनाया जाए। वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है और उनके बताए गये कामों को भाजपा सरकार तवज्जो देती है। उन्होंने एक मारवाड़ी कहावत के जरिए वसुंधरा को आईना दिखाने का काम किया। उन्होंने कहा कि "डिठी कोनी कोरे मूंग की, मांगे घी और दाल, मोटी तू क्यूं झगड़ों करै डिठी को नहीं नाम। उन्होंने इस कहावत का अर्थ बताते हुए कहा कि जब वास्तविकता कुछ और होती है, तब लोग बड़ी बड़ी अपेक्षाएं कर विवाद खड़ा कर देते हैं लेकिन शायद मदन राठौड़ अतीत को भूल गये, जब उन्हें 2023 के विधानसभा चुनावों में उनको उम्मीदवार नहीं बनाया तब उन्होंने बागी तेवर दिखाए थे। उस समय शीर्ष नेतृत्व से बात होने के बाद उनके बागी तेवर ढीले पड़े थे। शायद उनके बागी तेवरो का परिणाम था कि उन्हें राज्यसभा में भेजा गया व राजस्थान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की ताजपोशी की गई। आज पद को व कुर्सी को लेकर वसुंधरा पर तंज कसते हैं तो उनको भी अपने अतीत में झांकना होगा कि यह कुर्सी की ही लालसा थी कि उन्होंने बागी तेवर अपनाए थे। वसुंधरा राजे ने मदन राठौड़ के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी विचारधारा को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जो किसी साजिश से कम नहीं है । वसुंधरा राजे ने आगे कहा कि आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो संवाद को ग़लत तरीके से पेश कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जनता के समर्थन से उनके मंसूबे कामयाब नही होगे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने पद को लेकर कोई बात नहीं कही है। 
वसुंधरा राजे के बयान से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि प्रदेश स्तर पर गुटबाजी चल रही है। उनके बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश कर राजनीतिक लाभ प्राप्त करने वाले नेता आखिर कौन है, उनका खुलासा वसुंधरा राजे को करना चाहिए कि आखिर उनके खिलाफ प्रदेश में साजिश कौन कर रहा है। यह पहला मौका है कि वसुंधरा राजे की नसीहत पर किसी बड़े नेता ने इतनी गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त की है अन्यथा उनके बयानों पर अमूमन कोई नेता प्रतिक्रिया देने से बचता था। विदित हो उन्होंने प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी बयान दिया था। निश्चित रूप से मदन राठौड़ के बयान ने राजस्थान के सियासी पारे में उछाल ला दिया है। अब यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा कि आखिर इस बयान के क्या परिणाम आयेंगे।

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