राजस्थानी भाषा को मिले राज भाषा का दर्जा

AYUSH ANTIMA
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खाली धड़ री कद हुवै, चेहरै बिना पिछाण, राजस्थानी रै बिना क्यारो राजस्थान। स्वर्गीय श्री कन्हैया लाल सेठिया के इस दोहे से राजस्थानी भाषा की प्रासंगिकता स्पष्ट झलकती है कि इसे राजभाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए। राजस्थानी भाषा जो करोड़ों राजस्थानियों के लिए बोलचाल की भाषा है, अभी तक संवैधानिक रूप से आठवीं अनुसूची में क्षेत्रीय या अधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला है। राजस्थानी भाषा को राजभाषा बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसको लेकर गृह नगर पिलानी के राजस्थानी भाषा के साहित्यकार व कवि नागराज शर्मा, जो अपने 92 बसंत में भी इस अभियान मे सम्मिलित हैं। उनके द्वारा राजस्थानी भाषा को लेकर बिणजारो नामक पत्रिका, जिसका पिछले 45 सालो से अनवरत संपादन हो रहा है, अनेक राजस्थानी साहित्यकारो के लिए एक प्लेटफार्म के रूप में काम कर रहा है। राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव 3 सितम्बर 2003 को राजस्थान विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके साथ ही राजस्थानी भाषा को राजभाषा घोषित करने को लेकर वर्षों से आंदोलन चल रहे हैं लेकिन प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास विचाराधीन है। प्रदेश में राजस्थानी भाषा को दूसरी राजभाषा घोषित करने को लेकर विधायक, सांसद व मुख्यमंत्री से बार बार मांग करने के बाद भी जनता को केवल आश्वासन ही मिला है। यह मामला राज्य व केन्द्र सरकार की उदासीनता के चलते अधर में झूल रहा है। यदि राजस्थानी भाषा को राजभाषा घोषित कर दिया जाता है तो इससे जहां राजकाज के तहत सभी विभागों के कार्य राजस्थानी भाषा में संभव हो सकेंगे। इसके साथ ही उच्च शिक्षा तक इस भाषा को शामिल करने से विधार्थियों को फायदा होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा को शामिल करने से प्रदेश के युवाओ को ज्यादा अवसर मिलेंगे। इस भाषा को 8वी अनूसूची में शामिल होने से इसे अधिकारिक भाषा के रूप में पहचान मिलने के साथ ही शिक्षा में बढ़ावा व राजस्थानी साहित्य का संरक्षण संभव है। विदित हो कोई भी मातृभाषा किसी प्रदेश या क्षेत्र की संस्कृति और अस्मिता की संवाहक होती है। इसके बिना मौलिक चिंतन संभव नहीं है। संविधान की मान्यता प्राप्त 22 भाषाओं में राजस्थानी भाषा 17 भाषाओं से बड़ी है। राजस्थान की डबल इंजन सरकार को इस भाषा को मान्यता दिलाने को लेकर सार्थक प्रयास करने की ज़रूरत है। यदि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा अपने कार्यकाल में राजस्थानी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलवा देते हैं तो उनके कार्यकाल का यह ऐतिहासिक फैसला होगा।

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