राजस्थान में पंचायत व नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए गठित मदन लाल भाटी की अध्यक्षता वाले आयोग का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो रहा था, जिसे 30 सितम्बर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। इसके पीछे कारण दिया गया है कि पंचायतों के वार्ड पंचों के लिए ओबीसी आरक्षण के आंकड़े अपूर्ण और गलत पाए गये, जिसके कारण आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को समय पर नहीं दे सका। आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आंकड़ों में विसंगतियों की जानकारी दी थी, जिसके कारण डबल इंजन सरकार ने यह निर्णय लिया है। विदित हो सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट ने राजस्थान के पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था कि 15 अप्रेल 2026 तक चुनाव करवा लिए जाएं। इन चुनावों को लेकर भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार के मंत्रियों के भी विरोधाभासी बयान देखने को मिले, उनको देखकर भी संशय होने लगा कि माननीय कोर्ट द्वारा दी गई डैड लाईन के अनुसार चुनाव होंगे। बार बार अपना स्टेंड बदलने वाली डबल इंजन सरकार पर कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस ने बार बार यह कहा है कि इन चुनावों में भाजपा ने अपनी निश्चित हार को देखते हुए ओबीसी आयोग को ढाल बना रखा है। इसके साथ ही यह चुनाव होते ही मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की कुर्सी जाना तय है, इसी को लेकर चुनाव टाले जा रहे हैं कि जितना हो सके सत्ता सुख भोगा जाए क्योंकि पूर्व की पदवी मिलने के बाद यह राजसी ठाट-बाठ जाने तय है।
अभी तक जिन पंचायत और निकाय चुनावों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, वहां सरकार ने प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं और मंत्रियों के चहेतो की पौ बारह होनी तय है। माननीय कोर्ट के फैसले के अनुसार चुनाव 15 अप्रेल तक होने मुमकिन नहीं है लेकिन जैसा भाजपा वाले कहते हैं कि मोदी है तो मुमकिन है, उस चमत्कार की प्रतीक्षा भी राजस्थान के आमजन को करनी चाहिए। अब यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो नवम्बर-दिसम्बर में इन चुनावों की आशा की जा सकती है। पंचायत व नगर निकाय चुनावों में जो टाल मटोल देखने को मिल रही है, इसको हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम ही कहा जायेगा। कांग्रेस के आरोप के परिपेक्ष्य में देखे तो आखिर कब तक, चुनावी दंगल में तो आना ही होगा।